• About us
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • Terms & Conditions
  • Child Safety Policy
  • Contact
24 Ghante Latest Hindi News
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
No Result
View All Result

वट सावित्री व्रत कब रखा जाएगा, जानें सही पूजा विधि

Writer D by Writer D
13/04/2025
in Main Slider, धर्म, फैशन/शैली
0
Vat Savitri Vrat

Vat Savitri Vrat

14
SHARES
176
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterShare on Whatsapp

वट सावित्री व्रत (Vat Savitri Vrat) सुहागिन महिलाओं के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। यह व्रत महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और परिवार की खुशहाली के लिए रखती हैं। यह व्रत ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि के दिन रखा जाता है। वत सावित्री व्रत को देशभर में अलग-अलग नामों जाना जाता है जैसे कि बड़मावस, बरगदाही, वट अमावस्या आदि। वट सावित्री का व्रत (Vat Savitri Vrat) सबसे पहले राजा अश्वपति की पुत्री सावित्री ने अपने पति सत्यवान के लिए किया था। तभी से वट सावित्री व्रत महिलाएं अपने पति के मंगल कामना के लिए रखती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को पूरे विधि-विधान से करने से अखंड सौभाग्य का वरदान प्राप्त होता है।

वट सावित्री व्रत (Vat Savitri Vrat) 2025 कब है?

हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह अमावस्या तिथि की शुरुआत 26 मई को दोपहर 12 बजकर 11 मिनट पर होगी। वहीं तिथि का समापन अगले दिन यानी 27 मई को सुबह 8 बजकर 31 मिनट पर होगा। ऐसे में वट सावित्री का व्रत (Vat Savitri Vrat) सोमवार 26 मई को रखा जाएगा।

वट सावित्री व्रत (Vat Savitri Vrat) की पूजा विधि

वट सावित्री व्रत (Vat Savitri Vrat) के दिन पूजा करने के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। उसके बाद सास ससुर का आशीर्वाद लेकर व्रत का संकल्प करें। वट सावित्री व्रत के दिन विशेष रूप से लाल रंग के वस्त्र पहनने चाहिए। साथ ही सोलह श्रृंगार करने का भी विशेष महत्व होता है। इसके बाद सात्विक भोजन तैयार करें। इसे बाद वट वृक्ष के पास जाकर पंच देवता और भगवान विष्णु का आह्वान करें।

तीन कुश और तिल लेकर ब्रह्मा जी और देवी सावित्री का आह्वान करते हुए ‘ओम नमो ब्रह्मणा सह सावित्री इहागच्छ इह तिष्ठ सुप्रतिष्ठितः भव’। मंत्र का जप करें। इसके बाद जल अक्षत, सिंदूर, तिल, फूल, माला, पान आदि सामग्री अर्पित करें। फिर एक आम लें और उसके ऊपर से वट वृक्ष पर जल अर्पित करें।

इस आम को अपने पति को प्रसाद के रूप में दें। साथ ही कच्चे सूत के धागे को लेकर उसे 7 या 21 बार वट वृक्ष पर लपेटते हुए परिक्रमा करें। हालांकि, 108 परिक्रमा यदि आप करते हैं तो वह सर्वोत्तम माना जाता है। अंत में व्रत का पारण काले चने खाकर करना चाहिए।

Tags: vat savitri
Previous Post

अक्षय तृतीया पर करें इन चीजों का दान, कभी नहीं होगी धन की कमी

Next Post

बैसाखी कब है, जानें इसका धार्मिक महत्व

Writer D

Writer D

Related Posts

Main Slider

सीएम योगी का उपहार: लखनऊ में दस लाख लोगों को मिलेगा अपना घर

24/09/2026
Main Slider

उत्तराखण्ड की जनता स्थायित्व और विकास चाहती है : मुख्यमंत्री

24/09/2026
Main Slider

मुख्यमंत्री ने भारत टैक्सी के पांच सारथियों को किया सम्मानित, कृषक समृद्धि योजना के लाभार्थियों को प्रदान किया चेक

23/09/2026
Main Slider

ईशान आनंद को मिला बुआ का आशीर्वाद, मायावती ने बनाया नेशनल कोऑर्डिनेटर

23/09/2026
Main Slider

मुख्य सचिव ने किया आईआईएम काशीपुर के दून कैंपस का भूमिपूजन

23/09/2026
Next Post
Baisakhi

बैसाखी कब है, जानें इसका धार्मिक महत्व

यह भी पढ़ें

Mustard Oil

सरसों का तेल हुआ सस्ता, दाल-दलहन में रहा मिलाजुला रुख

10/03/2024
arrested

बदला लेने को युवक की हुई थी हत्या, चार अभियुक्त गिरफ्तार

30/12/2021
Shigeru Ishiba

जापान के नए प्रधानमंत्री बने शिगेरू इशिबा, फुमियो किशिदा की लेंगे जगह

27/09/2024
Facebook Twitter Youtube

© 2017 24घंटेऑनलाइन

  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म

© 2017 24घंटेऑनलाइन

Go to mobile version