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इन दो जीवों की तरह ही मनु्ष्य में छिपी होती है ये खतरनाक प्रवृत्ति

Desk by Desk
14/09/2020
in Main Slider, फैशन/शैली
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लाइफ़स्टाइल डेस्क। आचार्य चाणक्य की नीतियां और विचार भले ही आपको थोड़े कठोर लगे लेकिन ये कठोरता ही जीवन की सच्चाई है। हम लोग भागदौड़ भरी जिंदगी में इन विचारों को भरे ही नजरअंदाज कर दें लेकिन ये वचन जीवन की हर कसौटी पर आपकी मदद करेंगे। आचार्य चाणक्य के इन्हीं विचारों में से आज हम एक और विचार का विश्लेषण करेंगे। आज का ये विचार जीव और मनुष्य के मन दोनों में जहर होता है इस पर आधारित है।

‘सांप के दांत में, बिच्छू के डंक में और मनुष्य के मन में जहर होता है।’ आचार्य चाणक्य

आचार्य चाणक्य के इस कथन का मतलब है कि हर किसी में जहर होता है। फिर चाहे वो कोई जीव हो या फिर मनुष्य। यहां पर आचार्य चाणक्य ने जीव और मनुष्य दोनों की प्रवृत्ति के बारे में बताया है। आचार्य चाणक्य का कहना है कि चाहे सांप के दांत हो, बिच्छू का डंक हो या फिर मनुष्य का मन, इन तीनों में एक चीज समान है। ये कॉमन चीज जहर है।

सांप को कितना भी आप पाल लें (पालने से मतलब सपेरे से है) उसे दूध पिला लें या फिर उसकी पूजा कर लें। उसके दांतों में मौजूद जहर के असर से किसी का भी बचना मुश्किल है। ऐसा इसलिए क्योंकि डसना उसकी प्रवृत्ति है। अपनी इसी प्रवृत्ति से विवश होकर वो किसी के भी शरीर में जहर को प्रवेश करा सकता है। ठीक इसी तरह बिच्छू है। वैसे तो कोई बिच्छू को पालना पसंद नहीं करता लेकिन ये भी अपनी प्रवृत्ति से विवश है। उसके डंक में भी जहर भरा होता है। वो जब भी किसी पर वार करता है तो अपने इन्हीं डंकों से उस पर हमला बोलता है।

वहीं मनुष्य की बात की जाए तो इन सब में सबसे जहरीला मनुष्य ही होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि वो अपने दिमाग का इस्तेमाल जरूरत से ज्यादा करता है। साथ ही उसके मन में क्या चल रहा है इसका अंदाजा वो किसी को भी लगने नहीं देता। मौका देखकर वो किसी दूसरे पर ऐसा हमला करता है कि वो चारो खाने चित हो जाता है। इसी वजह से आचार्य चाणक्य ने कहा है कि सांप के दांत में, बिच्छू के डंक में और मनुष्य के मन में जहर होता है।

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