अयोध्या, 29 जून। रामनगरी अयोध्या के भव्य राम मंदिर में हुए बहुचर्चित चढ़ावा चोरी (Ram Temple Offering Theft) मामले में सोमवार को एक और अहम कानूनी प्रक्रिया पूरी हुई। गिरफ्तार किए गए सभी 8 आरोपियों की पुलिस रिमांड की अवधि आज समाप्त हो रही थी, जिसके चलते उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए अदालत में पेश किया गया। मामले की संवेदनशीलता और जांच की कड़ियों को जोड़ने की जरूरत को देखते हुए, अदालत ने सभी आरोपियों की रिमांड आगामी 13 जुलाई 2026 तक के लिए मंजूर कर दी है।
इस विस्तारित रिमांड अवधि के दौरान विशेष जांच दल (SIT) इस बड़ी साजिश के विभिन्न पहलुओं और वित्तीय हेरफेर की गहराई से तफ्तीश करेगी। एसआईटी जरूरत पड़ने पर इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों और संबंधित लोगों को भी समन जारी कर पूछताछ कर सकती है। वर्तमान में मामले की जांच तेजी से जारी है और अदालत में इन आरोपों का गहन विधिक परीक्षण होना अभी बाकी है। न्यायिक प्रक्रिया के नियमों के अनुसार, आरोपियों के विरुद्ध लगे ये सभी आरोप अभी पूरी तरह से विचाराधीन हैं।
चोरी का पूरा घटनाक्रम और एसआईटी की कार्रवाई:
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6 जून को सामने आया मामला: राम मंदिर की भेंट और चढ़ावा धनराशि में बड़े पैमाने पर चोरी और हेरफेर का यह गंभीर मामला सबसे पहले बीती 6 जून को प्रकाश में आया था।
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एसआईटी का गठन और रिपोर्ट: राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की आधिकारिक सिफारिश के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी (SIT) का गठन किया था। जांच दल ने दो दिन पहले ही अपनी विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंपी थी।
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25 जून को दर्ज हुई एफआईआर: एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर 25 जून की शाम को मंदिर ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की तहरीर पर पुलिस ने नामजद एफआईआर दर्ज की थी।
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इन 8 आरोपियों पर दर्ज हुआ मुकदमा: दानराशि की गणना प्रक्रिया में सीधे शामिल रहने वाले कर्मी अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय और रमाशंकर मिश्रा को इसमें नामजद किया गया है। इसके अलावा, पर्यवेक्षण (Supervision) के कार्य में तैनात सुभाष श्रीवास्तव और पूर्व महासचिव चंपत राय के चालक रामशंकर उर्फ टिन्नू को भी इस वित्तीय धोखाधड़ी और चोरी में संलिप्त पाया गया है।
एसआईटी की जांच रिपोर्ट से यह पुख्ता तथ्य सामने आया है कि चढ़ावे के पैसों की गिनती करने वाले इन सेवारत कर्मियों ने योजनाबद्ध तरीके से दानराशि की चोरी की। वहीं, सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था के जिम्मेदार सुभाष श्रीवास्तव और बैंक पर्यवेक्षणीय कर्मी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू की भूमिका भी प्रथम दृष्टया (Prima Facie) इस पूरे सिंडिकेट को शह देने की रही है। इसी पुख्ता आधार और तकनीकी साक्ष्यों को देखते हुए पुलिस ने इन आठों आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा है, जिनसे अब 13 जुलाई तक रिमांड में आगे की पूछताछ की जाएगी।









