समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता आजम खान के बेटे और पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम खान (Abdullah Azam) को दोहरे पासपोर्ट (फर्जी पासपोर्ट) मामले में एक बहुत बड़ी कानूनी और राजनीतिक सफलता मिली है। एमपी-एमएलए (MP-MLA) सेशन कोर्ट ने उनके पक्ष की दलीलों को स्वीकार करते हुए मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा पहले सुनाई गई 7 साल की जेल की सजा को पूरी तरह से रद्द कर दिया है। अदालत ने अब्दुल्ला आजम को इस पूरे मामले में सभी आरोपों से दोषमुक्त (बरी) घोषित कर दिया है।
मजिस्ट्रेट कोर्ट ने सुनाई थी 7 साल की सजा:
इससे पहले, रामपुर की विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने अब्दुल्ला आजम खान (Abdullah Azam) को कूट रचित (फर्जी) दस्तावेजों के आधार पर दोहरे पासपोर्ट बनवाने और उनका इस्तेमाल करने का दोषी पाया था। मजिस्ट्रेट कोर्ट ने उन्हें आईपीसी (IPC) की विभिन्न गंभीर धाराओं (420, 467, 468 और 471) के तहत दोषी करार देते हुए अधिकतम 7 साल के कड़े कारावास और 50,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। निचली अदालत के इसी फैसले को चुनौती देते हुए अब्दुल्ला आजम के वकीलों ने सेशन कोर्ट में अपील दायर की थी।
शुक्रवार को दोपहर करीब तीन बजे हुई इस महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट ने अपना ऐतिहासिक निर्णय सुनाया। अब्दुल्ला आजम खान (Abdullah Azam) के वकील नासिर सुल्तान ने इस अदालती आदेश की पुष्टि करते हुए मीडिया को बताया कि हमने अदालत के समक्ष सभी मूल दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत किए थे। माननीय सेशन कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों, केस डायरी और पूर्व में पेश किए गए दस्तावेजों का गहराई से पुनरीक्षण (Review) किया। अदालत ने पाया कि निचली अदालत का फैसला पूरी तरह न्यायसंगत नहीं था, जिसके बाद मजिस्ट्रेट कोर्ट के सजा के आदेश को खारिज करते हुए अब्दुल्ला आजम को पूरी तरह बरी कर दिया गया।
क्या था पूरा मामला?
यह विवाद वर्ष 2019 में तब शुरू हुआ था जब रामपुर से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक आकाश सक्सेना ने सिविल लाइंस थाने में एक प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि अब्दुल्ला आजम खान (Abdullah Azam) ने अपने शैक्षणिक प्रमाणपत्रों (High School Certificates) और सरकारी दस्तावेजों में अलग-अलग जन्मतिथियां दर्ज करा रखी हैं। आरोप था कि उन्होंने अनुचित लाभ लेने के उद्देश्य से असत्य और कूट रचित विवरणों का सहारा लेकर जालसाजी से दो अलग-अलग पासपोर्ट बनवाए और उनका व्यावसायिक व राजनीतिक इस्तेमाल किया।
समर्थकों में खुशी, राजनीतिक हलचल तेज: इस मामले को लेकर उत्तर प्रदेश के सियासी और कानूनी गलियारों में काफी लंबे समय से तीखी बहस चल रही थी। दो पैन कार्ड और फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जैसे मामलों के बाद इस तीसरे बड़े केस (पासपोर्ट मामले) में सेशन कोर्ट से सीधे दोषमुक्ति (Acquittal) मिलना आजम खान के परिवार के लिए एक बड़ी संजीवनी माना जा रहा है। फैसले की खबर आते ही समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं और अब्दुल्ला आजम के समर्थकों ने राहत की सांस ली है, जबकि विपक्षी दलों में अब इस फैसले के खिलाफ उच्च अदालत (हाईकोर्ट) में अपील किए जाने को लेकर रणनीतियां बननी शुरू हो गई हैं।








