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हिंदी हमारी राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक पहचान की सशक्त अभिव्यक्ति: सीएम धामी

Writer D by Writer D
14/09/2026
in Main Slider, उत्तराखंड, राष्ट्रीय
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देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हिंदी दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में आयोजित समारोह में साहित्यकारों, लेखकों, भाषाविदों, छात्र-छात्राओं और हिंदी प्रेमियों को शुभकामनाएं दीं। इस दौरान उन्होंने कहा कि हिंदी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि भारत की राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक पहचान की सशक्त अभिव्यक्ति है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिंदी दिवस अपनी भाषा, राष्ट्रीय पहचान और सांस्कृतिक गौरव को संजोने तथा नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण अवसर है। हिंदी ने देश के विभिन्न क्षेत्रों, भाषाओं, बोलियों और संस्कृतियों के बीच संवाद का सेतु बनकर ‘विविधता में एकता’ की भावना को मजबूत किया है।

उन्होंने कहा कि 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को देवनागरी लिपि में संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था। मुख्यमंत्री ने भारतेंदु हरिश्चंद्र की प्रसिद्ध पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि अपनी भाषा केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की उन्नति का आधार भी है। जो समाज अपनी भाषा और साहित्य को सहेजता है, वह अपनी संस्कृति और पहचान को भी सुरक्षित रखता है।

हिंदी को तकनीक और डिजिटल दुनिया से जोड़ने पर जोर

सीएम धामी ने कहा कि वर्तमान समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और डिजिटल तकनीक का है। ऐसे में हिंदी को केवल पुस्तकों और कक्षाओं तक सीमित रखने के बजाय विज्ञान, तकनीक, शोध और डिजिटल दुनिया की भी मजबूत भाषा बनाना होगा।

उन्होंने युवाओं से नई तकनीक और अन्य भाषाओं का ज्ञान हासिल करने के साथ अपनी हिंदी और मातृभाषा पर गर्व बनाए रखने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक का उपयोग हिंदी को दुनिया के हर मंच तक पहुंचाने के लिए किया जाना चाहिए।

उत्तराखंड की लोकभाषाएं हमारी सांस्कृतिक धरोहर

मुख्यमंत्री ने कहा कि भाषा और साहित्य का संबंध बेहद गहरा है। उत्तराखंड ने हिंदी और भारतीय साहित्य को अनेक महत्वपूर्ण साहित्यकार दिए हैं। उन्होंने राष्ट्रकवि सुमित्रानंदन पंत, साहित्यकार गौरा पंत ‘शिवानी’, कवि चंद्रकुंवर बर्त्वाल और रचनाकार प्रसून जोशी का उल्लेख करते हुए कहा कि इन साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से हिमालय, प्रकृति, लोकजीवन और समाज की संवेदनाओं को व्यापक पहचान दी है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की पहचान हिंदी के साथ-साथ यहां की समृद्ध लोकभाषाओं और बोलियों से भी है। गढ़वाली, कुमाऊंनी, जौनसारी, भोटिया, थारू और बंगाणी सहित प्रदेश की विभिन्न लोकभाषाएं एवं बोलियां राज्य की महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहर हैं। राज्य सरकार हिंदी के साथ क्षेत्रीय भाषाओं, साहित्य और साहित्यकारों के संरक्षण एवं सम्मान के लिए प्रतिबद्ध है।

साहित्यकारों के सम्मान और प्रकाशन को बढ़ावा

सीएम धामी ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा ‘दीर्घकालीन साहित्य सेवी सम्मान’ के माध्यम से जीवनभर साहित्य साधना करने वाले साहित्यकारों को पांच लाख रुपये की सम्मान राशि प्रदान की जा रही है। ‘उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान’ के अंतर्गत हिंदी, गढ़वाली, कुमाऊंनी, जौनसारी, पंजाबी और उर्दू सहित विभिन्न भाषाओं के साहित्यकारों को सम्मानित किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि ‘साहित्य भूषण’ पुरस्कार के माध्यम से उत्कृष्ट साहित्यकारों को 5.51 लाख रुपये की सम्मान राशि प्रदान की जा रही है। इसके अलावा हिंदी और स्थानीय भाषाओं को डिजिटल माध्यमों से जोड़ने, ‘बुके नहीं, बुक देंगे’ जैसी पहल के जरिए पुस्तक पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने तथा रचनाकारों को पुस्तकों के प्रकाशन के लिए आर्थिक अनुदान देने का कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भाषा संस्थान के माध्यम से उत्तराखंड के अप्रकाशित और बिखरे साहित्य के संग्रह, संरक्षण और प्रकाशन की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

126 विद्यार्थी सम्मानित

हिंदी दिवस समारोह के अवसर पर साहित्यिक एवं रचनात्मक लेखन प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 126 विजेता विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए हिंदी के अध्ययन और रचनात्मक लेखन को निरंतर आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक सविता कपूर, उमेश शर्मा काऊ, प्रो. जगत सिंह बिष्ट, सचिव भाषा विभाग उमेश नारायण पांडे, निदेशक भाषा मायावती ढकरियाल सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

Tags: Uttarakhand News
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