उत्तर प्रदेश की महत्वाकांक्षी गंगा एक्सप्रेसवे परियोजना (Ganga Expressway) पहली ही तेज बारिश के बाद सवालों के घेरे में आ गई है। हरदोई जिले के पास एक्सप्रेसवे का करीब 10 मीटर लंबा हिस्सा अचानक धंस गया, जिसके बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता और तकनीकी मानकों को लेकर चर्चा तेज हो गई। घटना के बाद प्रशासन और निर्माण एजेंसी के अधिकारियों में हड़कंप मच गया।
सूचना मिलते ही उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) के वरिष्ठ अधिकारी और इंजीनियर मौके पर पहुंचे। प्रभावित हिस्से का निरीक्षण करने के बाद सुरक्षा के मद्देनजर क्षेत्र को बैरिकेडिंग कर सील कर दिया गया। साथ ही उस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही रोककर वैकल्पिक रास्ते से ट्रैफिक डायवर्ट किया गया।
लगातार बारिश के बाद धंसी सड़क
प्रारंभिक जांच में माना जा रहा है कि लगातार हो रही भारी बारिश के कारण सड़क के नीचे की मिट्टी कमजोर हो गई, जिससे ऊपरी सतह अपना संतुलन खो बैठी और सड़क धंस गई। हालांकि राहत की बात यह रही कि घटना के समय वहां से कोई वाहन नहीं गुजर रहा था, जिससे किसी तरह की जनहानि या बड़ा हादसा नहीं हुआ।
निर्माण गुणवत्ता की होगी जांच
घटना के बाद संबंधित निर्माण एजेंसी से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। तकनीकी विशेषज्ञों की टीम यह पता लगाने में जुटी है कि सड़क केवल अत्यधिक वर्षा के कारण क्षतिग्रस्त हुई या फिर निर्माण प्रक्रिया में किसी प्रकार की तकनीकी खामी या गुणवत्ता संबंधी लापरवाही रही। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
सरकार के लिए बढ़ी चुनौती
गंगा एक्सप्रेसवे प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में गिना जाता है। ऐसे में शुरुआती चरण में सड़क धंसने की घटना ने परियोजना की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष ने भी इसे लेकर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है और निर्माण की गुणवत्ता पर जवाब मांगा है।
अब सरकार और निर्माण एजेंसी के सामने सबसे बड़ी चुनौती न केवल क्षतिग्रस्त हिस्से की शीघ्र मरम्मत करना है, बल्कि यह भरोसा भी कायम रखना है कि एक्सप्रेसवे पूरी तरह सुरक्षित और निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है।









