• About us
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • Terms & Conditions
  • Child Safety Policy
  • Contact
24 Ghante Latest Hindi News
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
No Result
View All Result

यूपी के इन राजनेताओं के लिए एमपी राज्यपाल की कुर्सी बनी अशुभ,पद पर रहते हुआ निधन

Desk by Desk
21/07/2020
in Main Slider, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजनीति, राष्ट्रीय
0
एमपी राज्यपाल की कुर्सी बनी अशुभ

एमपी राज्यपाल की कुर्सी बनी अशुभ

14
SHARES
176
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterShare on Whatsapp

लखनऊ। यूपी से जिस राजनेता को मध्य प्रदेश का राज्यपाल बनाया गया उसका लिए यह कुर्सी अशुभ ही साबित हुई है। लालजी टंडन तीसरे ऐसे राजनेता रहे जिनका मध्य प्रदेश के राज्यपाल रहते हुए निधन हुआ है। इसके पहले रामप्रकाश गुप्ता और रामनरेश यादव भी मध्य प्रदेश के राज्यपाल रहे और जिनका निधन उनके इस पद पर रहते हुए ही हुआ था।

यूपी की राजनीति में भाजपा को उंचाईयों तक पहुंचाने वाले नेताओं में से एक लालजी टंडन का लम्बा राजनीतिक करियर रहा है। 50 साल पहले सभासद से शुरू हुआ उनका राजनीतिक सफर मध्य प्रदेश के राज्यपाल होने तक जारी रहा। एक समय उनका नाम यूपी के मुख्यमंत्री बनाने तक चला। उन्होंने नगर विकास मंत्री के पद पर रहते पूरे प्रदेश को विकास की उंचाइयों तक पहुंचाने का काम किया। यही नहीं, आज जो आधुनिक लखनऊ दिखाई पड़ रहा है।

भाजपा बसपा की साझा सरकार बनने पर लालजी टंडन की बड़ी भूमिका रही। वह दो बार उत्तर प्रदेश विधान परिषद तथा तीन बार विधानसभा के सदस्य रहे। इसके अलावा यूपी में पहली बार भाजपा सरकार बनने पर उन्हे वित्तमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गयी थी।

एन95 मास्क भी कोरोना वायरस से नहीं बचा सकता , केंद्र सरकार की चेतावनी जारी

साल 2009 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के राजनीति से दूर होने के बाद लखनऊ लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे। इस चुनाव में उन्होंने यह सीट बेहद आसानी से जीत ली। लालजी टंडन 23 अगस्त 2018 को बिहार का राज्यपाल बनाया गया। इसके बाद उन्हे 20 जुलाई 2019 को मध्य प्रदेश का राज्यपाल बनाया गया था।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और मध्य प्रदेश के राज्यपाल रामप्रकाश गुप्ता 1946 में आरएसएस के प्रचारक बने। इसके बाद 1948 में संघ पर से प्रतिबंध हटाने के लिए सत्याग्रह किया। जनसंघ के बनने के बाद वह 1956 में इस दल के संगठन मंत्री बनाए गए। यूपी के लखनऊ समेत 10 जिलों का काम इनको दिया गया। 1960 में लखनऊ नगरपालिका में जनसंघ के नेता के रूप में पहुंचे। 1964 में इसी में डिप्टी मेयर बने। 1964 में ही यूपी विधान परिषद में चुन लिए गए।

इसी बीच 1967 में चौधरी चरण सिंह की सरकार में मंत्री रहे। फिर उप-मुख्यमंत्री बनाए गए। फिर 1973-73 में भारतीय जनसंघ के प्रदेश अध्यक्ष बने वह उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री भी रह चुके हैं जब चौधरी चरण सिंह ने 1967 में गैर कांग्रेस दलों को एकीकृत करके सरकार बनायीं थी। वे 1977 जनता पार्टी की सरकार में उद्योग मंत्री रहे चुके हैं। 12 नवम्बर, 1999 से 28 अक्टूबर, 2000 तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। वह 7 मई, 2003 को मध्यप्रदेश के राज्यपाल बनाए गए थे। अभी एक साल ही ही हुआ था कि एक मई, 2004 को उनका निधन हो गया।

रामनरेश यादव आजमगढ़ जिले के फूलपुर तहसील के आंधीपुर गाँव के निवासी थे। वह 1977 में जनता पार्टी की सरकार में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे और लगभग दो साल तक यूपी के सीएम पद रहे थे .इसके बाद आठ सितंबर, 2011 को वह मध्य प्रदेश के राज्यपाल बने और आठ सितंबर, 2016 को उनका कार्यकाल समाप्त हुआ था। रामनरेश यादव का जन्म एक जुलाई 1928 को उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के आंधीपुर(अम्बारी) गांव में एक साधारण किसान गया प्रसाद परिवार और भगवन्ती देवी के घर में हुआ था। ,पिता गया प्रसाद महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू और डॉ॰ राममनोहर लोहिया के अनुयायी थे।

स्वर्गीय राम नरेश यादव को देशभक्ति, ईमानदारी और सादगी की शिक्षा अपने पिता से ही विरासत में मिली थी। बहुमुखी प्रतिभा के धनी स्वर्गीय राम नरेश यादव को लोग बाबूजी के नाम से भी बुलाते थे। रामनरेश यादव का विवाह साल 1949 में अंबेडकर नगर के करमिसिरपुर (मालीपुर) गांव में अनारी देवी ऊर्फ शांति देवी के साथ हुआ था।

यादव ने छात्र जीवन से समाजवादी आन्दोलन में शामिल होकर अपने राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन की शुरूआत की। चैधरी चरण सिंह के बुलाने पर 1977 के जनता पार्टी की सरकार में आए और 23 जून 1977 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। रामनरेश यादव ने 8 सितम्बर 2011 को मध्यप्रदेश के राज्यपाल पद बनने के बाद वह 7 सितम्बर 2016 तक मध्यप्रदेश के राज्यपाल रहे। हांलाकि जिस समय उनका निधन हुआ उस समय वह राज्यपाल का कार्यकाल खत्म हो चुका था लेकिन अगले तब तक उनके पास कार्यवाहक राज्यपाल की जिम्मेदारी थीं।

Tags: became the chair of MP Governor for these UP politiciansdied while in officeInauspiciousएमपी राज्यपाल की कुर्सी बनी अशुभ
Previous Post

पाकिस्तान ने ‘सदाबाहार दोस्‍त’ को दिया बड़ा झटका, चीन के इस ऐप पर लगाया बैन, TikTok को भी अंतिम चेतावनी

Next Post

लालजी टंडन के निधन पर मध्यप्रदेश में पांच दिन का राजकीय शोक घोषित

Desk

Desk

Related Posts

Rudraksha ki mala
Main Slider

रुद्राक्ष धारण करने से मिलती सभी कष्टों से मुक्ति, जानें माला पहनने के नियम

16/07/2026
Hair color
Main Slider

पहली बार हेयर कलर करते समय इन बातों का रखें ख्याल

16/07/2026
Makeup
Main Slider

बारिश में नहीं खराब होगा मेकअप, इन बातों का रखें ध्यान

16/07/2026
'Himala water' will be available in the market from August 15
Main Slider

UCF की नई पहल, 15 अगस्त से बाजार में उतरेगा ‘हिमाला जल’

15/07/2026
Nandini Yojana changed the life of Shakuntala Devi
उत्तर प्रदेश

मोदी-योगी सरकार की नंदनी योजना बनी वरदान, प्रयागराज की शकुंतला देवी हुईं आत्मनिर्भर

15/07/2026
Next Post
लालजी टंडन का निधन

लालजी टंडन के निधन पर मध्यप्रदेश में पांच दिन का राजकीय शोक घोषित

यह भी पढ़ें

Ramlila

टूट जाएगी 350 साल की परंपरा, कुंभकर्ण और मेघनाद का अब नहीं होगा दहन

03/10/2022
Explosion

स्टील फैक्ट्री में हुआ तेज धमाका, 15 श्रमिक बुरी तरह झुलसे

21/09/2023
rajaendra tiwari

कोविड-19 की संभावित तीसरी लहर के मद्देनजर सभी तैयारियां समय से हों पूर्ण : तिवारी

06/07/2021
Facebook Twitter Youtube

© 2017 24घंटेऑनलाइन

  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म

© 2017 24घंटेऑनलाइन

Go to mobile version