उत्तर प्रदेश के पावर कॉर्पोरेशन (UPPCL) और उससे जुड़े विद्युत निगमों में लंबे समय से रिक्त पड़े निदेशक स्तर के नौ पदों को भरने की प्रक्रिया तेज हो गई है। शनिवार को इन पदों के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के साक्षात्कार आयोजित किए गए। इसी बीच ट्रांसमिशन निगम के इकलौते दलित निदेशक राजेश कुमार के इस्तीफे ने ऊर्जा विभाग में नई चर्चा छेड़ दी है। उनके इस्तीफे के बाद निगमों में दलित समुदाय का कोई भी निदेशक नहीं बचा है।
नौ पदों के लिए 22 वरिष्ठ अधिकारियों का इंटरव्यू
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित चयन समिति ने निदेशक स्तर के नौ रिक्त पदों के लिए साक्षात्कार लिए। इस प्रक्रिया में कुल 22 वरिष्ठ अभियंताओं ने भाग लिया। इनमें सात अधिकारी विभिन्न विद्युत निगमों से थे, जबकि बाकी उम्मीदवार निजी क्षेत्र की कंपनियों से आए थे।
साक्षात्कार देने वालों में पावर कॉर्पोरेशन के निदेशक (वितरण) जीडी द्विवेदी, पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम के निदेशक (तकनीक) और पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के निदेशक (तकनीक) जितेंद्र नलवाया जैसे वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल रहे।
राजेश कुमार के इस्तीफे से उठे प्रतिनिधित्व के सवाल
इंटरव्यू प्रक्रिया के बीच ट्रांसमिशन निगम में निदेशक (नियोजन एवं वाणिज्य) के पद पर कार्यरत राजेश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। वह ऊर्जा निगमों में दलित समुदाय से जुड़े इकलौते निदेशक थे। उनके इस्तीफे के बाद अब पावर कॉर्पोरेशन और उससे जुड़े सभी निगमों में दलित समुदाय का कोई प्रतिनिधि निदेशक स्तर पर नहीं रह गया है।
राजेश कुमार ने अपने इस्तीफे का कारण व्यक्तिगत बताया है। हालांकि, उनके इस्तीफे के बाद इसे लेकर अलग-अलग स्तर पर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
दलित संगठनों ने पहले भी उठाए थे सवाल
ऊर्जा निगमों में दलित अधिकारियों की भागीदारी और प्रतिनिधित्व का मुद्दा पहले भी उठता रहा है। विभिन्न दलित संगठनों ने निगमों में कथित उत्पीड़न, निलंबन और पदोन्नति से जुड़े मामलों को लेकर पावर कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष और ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा को ज्ञापन सौंपे थे।
ऐसे में राजेश कुमार के इस्तीफे ने एक बार फिर ऊर्जा निगमों में सामाजिक प्रतिनिधित्व और प्रशासनिक संतुलन को लेकर बहस को तेज कर दिया है। अब चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद नए निदेशकों की नियुक्ति पर भी सभी की नजर रहेगी।









