• About us
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • Terms & Conditions
  • Child Safety Policy
  • Contact
24 Ghante Latest Hindi News
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
No Result
View All Result

चिंता का सबब बनतीं  किसान पंचायतें

Writer D by Writer D
17/02/2021
in Main Slider, नई दिल्ली, राजनीति, राष्ट्रीय
0
kisan panchayat

kisan panchayat

14
SHARES
176
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterShare on Whatsapp

देश भर में जिस तरह किसानों की पंचायतें हो रही हैं। खाप पंचायतें हो रही हैं और जिस तरह किसान अपनी मांगों को लेकर लामबंद हो रहे हैं, वह किसान जागरूकता के लिहाज से तो अच्छी बात हो सकती है लेकिन इससे केंद्र और भाजपाशासित राज्यों की सरकारों की पेशानियों पर बल पड़ गए हैं। ग णतंत्र दिवस पर दिल्ली के लालकिले में किसानों के एक उग्र समूह द्वारा धार्मिक ध्वज फहराने की जो अप्रत्याशित घटना हुई, उसके बाद एक झटके में ही किसान बैकफुट पर नजर आये थे। लग रहा था दिल्ली की सरहदों पर जमा किसानों का आंदोलन अब महज कुछ घंटों का ही रह गया है, लेकिन दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार ने जिस उतावले अंदाज में इस आंदोलन की गर्दन दबोचने की कोशिश की, उससे बिफरे राकेश टिकैत के आंसुओं ने ऐसा भावनात्मक दबाव बनाया कि देखते ही देखते पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और अब एक पखवाड़े बाद जब ये पंक्तियां लिखी जा रही है, समूचा उत्तर भारत किसान महापंचायतों के तूफान से घिर गया है।

गणतंत्र दिवस के बाद दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर में राकेश टिकैत के रो पड़ने के तुरंत बाद उनके बड़े भाई नरेश टिकैत ने 28 जनवरी 2021 को मुजफरनगर में सरकार के प्रतिबंधों के बावजूद महापंचायत बुलायी और इसमें मानो इंसानों का सैलाब ही उमड़ आया। पंचायत स्थल में जमीन के ऊपर जाकर ड्रोन से खीची गई तस्वीरों से पता चलता है कि मुजफरनगर महापंचायत में एक लाख से कम लोग नहीं रहे होंगे। लेकिन यह तो महज शुरु आत थी। मुजफरनगर पंचायत के तीन दिनों बाद ही 31 जनवरी 2021 को बागपत में जो किसान महापंचायत आयोजित हुई, उसमें मुजफरनगर की ही तरह किसानों का सैलाब तो उमड़ा ही, बड़ी बात यह हुई कि पिछले 32 सालों से सर्वखाप पंचायत का जो लगातार अभाव जारी था, वह अभाव भी खत्म हो गया। यह और बात की दिल्ली की सरहदों पर अब किसानों का उतना जमावड़ा नहीं रह गया है जितनी भीड़ किसान महापंचायतों में उमड़ रही है।  32 सालों में पहली बार पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कोई सर्वखाप के समर्थन वाली महापंचायत हुई। मालूम हो कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान का एक बड़ा हिस्सा और पंजाब का भी एक बड़ा हिस्सा खाप पंचायतों की संस्कृति वाला है।

बड़ी राहत : मेघालय सरकार ने पेट्रोल 5.40 रुपये और डीजल 5.10 रुपये सस्ता

खाप पचांयतें दरअसल जातीय पंचायतें होती हैं और उसमें तय हुई बातों को इन खापों के दायरे में आने वाले लोग किसी पत्थर की लकीर से कम नहीं मानते। बागपत में 31 जनवरी को जो रैली हुई उसमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश की दो प्रमुख खापें बालियान खाप और देशखाप एक साथ एक पंचायत में आयीं। सिर्फ ये दो खापें ही नहीं बल्कि चौबीसी, थांबा और चौगाना खापें भी इस पंचायत में एक साथ एक मंच पर इकट्ठा हो गईं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि उत्तर भारत में दिल्ली के किसान आंदोलन को किसानों ने किस कदर प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया है। बहरहाल सिर्फ मुजफ्फरनगर या बागपत में ही किसान महापंचायतें नहीं हुई बल्कि पिछले 15 दिनों में अलग-अलग जगहों में करीब दो दर्जन महापंचायतें हो चुकी हैं और जिस तेजी से ऐसी ही पंचायतों की कार्य योजना बनायी जा रही है, उससे अगले दो महीने में देश के हर महत्वपूर्ण कोने में एक बड़ी किसान महापंचायत देखने को मिल सकती है। मुजफरनगर और बागपत के बाद 10 फरवरी 2021 को सहारनपुर के चिलखाना में, 12 फरवरी 2021 को राजधानी दिल्ली के टीकरी बॉर्डर में, 13 फरवरी 2021 को बहादुरगढ़ हरियाणा में, 14 फरवरी 2021 को करनाल के इंद्री अनाज मंडी में, 15 फरवरी 2021 को बिजनौर और मेरठ में, 17 फरवरी 2021 मुरादाबाद की बिल्लारी तहसील में, 18 फरवरी 2021 को राजस्थान के श्री गंगानगर में और 19 फरवरी 2021 को हनुमानगढ़ राजस्थान में किसान महापंचायतें हुईं या होनी तय है। इन सभी जगहों पर किसान महापंचायतें तो हो ही रही हैं, इनके अलावा महाराष्टÑ के यवतमाल और औरंगाबाद में तथा आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में भी आने वाले दिनों में इसी तरह की बड़ी किसान महापंचायतों के आयोजन की घोषणाएं हो चुकी हैं।

कुख्यात अपराधी संजय यादव की एक करोड़ की संपत्ति कुर्क

इन महापंचायतों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, बिहार और मध्य प्रदेश के बड़े हिस्से में लगातार स्थानीय स्तर पर क्षेत्रीय किसान पंचायतें भी हो रही हैं, जिसे भले सरकार बहुत मामूली घटना मान रही हो, लेकिन आजादी के बाद यह पहला ऐसा मौका है जब एक साथ इतने बड़े पैमाने पर पंचायतें, खासतौर पर किसान पंचायतें, सरकार के खिलाफ उठ खड़ी हुई हैं। उत्तर भारत के इस तरह पंचायतों के तूफान से घिर जाने के गंभीर निहतार्थ हैं। सरकार को इसे बहुत हल्के में नहीं लेना चाहिए। माना कि किसान पंचायतें अहिंसक तरीके से हो रही हैं और किसान नेताओं का लगातार आह्वान भी है कि आंदोलन में किसी किस्म की हिंसा नहीं होनी चाहिए। मगर इन पंचायतों को हल्के में लेकर सरकार न सिर्फ देश के एक बड़े तबके को अपना भावनात्मक शत्रु बना रही है बल्कि इससे भारतीय समाज में असुरक्षा की भावना भी गहराती जा रही है। सरकारें अपनी ताकत के बल पर किसी की भी भावनाओं का कोई लिहाज नहीं कर रहीं। लोकतंत्र में यह सबसे खतरनाक बात होती है कि किसी समुदाय के अंदर यह धारणा गहरा जाए कि अगर वह कमजोर है तो सरकार उसकी नहीं सुनेगी।

गुजरात राज्यसभा उपचुनाव के लिए भाजपा ने अपने दो उम्मीदवारों का किया ऐलान

लोकतंत्र की संवेदना लोगों की संख्या की बजाय उनकी समस्या होनी चाहिए। केंद्र सरकार जिस तरह से इन पंक्तियों के लिखे जाने के समय तक 80 दिनों में किसानों की वैसी सुध नहीं ली कि लगे कि वह उनकी हमदर्द है। भयानक जाड़ा और जाड़े की बारिश में भी किसानों को खुले आसमान के नीचे बैठने को तो मजबूर होना ही पड़ा है, सरकार उन पर दबाव बनाने के लिए जब मन होता है पानी की सप्लायी बंद कर देती है, जब मन होता है बिजली काट देती है। इससे किसानों में ही नहीं बल्कि दूसरे तबकों में भी यह सोच बनती जा रही है कि सरकार को किसानों से जरा भी सहानुभूति नहीं है, वह उन्हें कतई संवेदना की नजरों से नहीं देखती।  यह गलत धारणा है। ऐसी धारणाओं से ही लोकतंत्र कमजोर होता है।

Tags: farmer protestKisan andolanNational news
Previous Post

शिवपाल यादव बोले- उत्तर प्रदेश की जनता चाहती है परिवर्तन

Next Post

पीएम मोदी बोले- इतिहास वो नहीं जो गुलामी की मानसिकता रखने वालों ने लिखा

Writer D

Writer D

Related Posts

Hair Wash
Main Slider

इस दिन नहीं धोने चाहिए बाल, घर में आती है दरिद्रता

27/09/2026
Main Slider

UPITS में दूसरे दिन 4,700 बी2बी बैठकें, 412 समझौते

26/09/2026
Main Slider

सीएम धामी ने उत्तराखण्ड विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति-2026 और GEP की तकनीकी रिपोर्ट का किया विमोचन

26/09/2026
Main Slider

भारी बारिश से प्रभावितों को तत्काल मिले राहत, सीएम योगी ने दिए सख्त निर्देश

26/09/2026
Main Slider

आज एक बड़ी बिजनेस अपॉर्चुनिटी बन सकता है वेस्ट मैनेजमेंट: ए.के. शर्मा

26/09/2026
Next Post
पीएम मोदी pm modi

पीएम मोदी बोले- इतिहास वो नहीं जो गुलामी की मानसिकता रखने वालों ने लिखा

यह भी पढ़ें

देश मंदी की तरफ बढ़ रहा, सरकार कर रही अनदेखी : पी चिदंबरम

12/11/2020
प्रमोद जैन भाया

न्यायालय का निर्णय जो भी होगा, उससे सरकार पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा, क्योंकि…

07/08/2020
Lava Android 11

Lava अपने स्मार्टफोन में कर रहा बड़ा बदलाव, एक साथ मिलेंगी कई सुविधाएं

17/07/2021
Facebook Twitter Youtube

© 2017 24घंटेऑनलाइन

  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म

© 2017 24घंटेऑनलाइन

Go to mobile version