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किशाऊ परियोजना को मिली निर्णायक गति, सीएम धामी बोले- आठ दशक का इंतजार अब होगा खत्म

Writer D by Writer D
15/09/2026
in Main Slider, उत्तराखंड, राष्ट्रीय
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नई दिल्ली। करीब आठ दशक से लंबित किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को आखिरकार निर्णायक गति मिल गई है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में नई दिल्ली के कर्तव्य भवन में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के बीच परियोजना के क्रियान्वयन को लेकर समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह केवल एक समझौते पर हस्ताक्षर का अवसर नहीं, बल्कि लगभग आठ दशकों से प्रतीक्षित किशाऊ परियोजना को धरातल पर उतारने की दिशा में निर्णायक कदम है। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और सभी सहभागी राज्यों का आभार जताया।

पीएम मोदी के नेतृत्व में दशकों पुरानी परियोजना को मिली गति

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि किशाऊ परियोजना की परिकल्पना वर्ष 1940 में की गई थी, लेकिन विभिन्न कारणों से इसे आगे नहीं बढ़ाया जा सका। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दशकों से लंबित महत्वपूर्ण परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि अमित शाह के मार्गदर्शन में 16 जून 2026 को हुई बैठक में परियोजना से जुड़ी कई महत्वपूर्ण अड़चनों के समाधान का मार्ग प्रशस्त हुआ। इसके बाद केंद्र और सहभागी राज्यों के बीच लगातार समन्वय के परिणामस्वरूप अब MoU पर हस्ताक्षर के साथ परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया को औपचारिक रूप मिला है।

422 मेगावाट बिजली, 1562 MCM क्षमता का बनेगा जलाशय

सीएम धामी ने किशाऊ परियोजना को राष्ट्रीय महत्व की बहुउद्देशीय परियोजना बताते हुए कहा कि यह जल सुरक्षा, ऊर्जा, सिंचाई, पेयजल और यमुना के पुनर्जीवीकरण से जुड़ी है।

परियोजना के तहत करीब 1562 MCM क्षमता का जलाशय तैयार होने के साथ 422 मेगावाट विद्युत उत्पादन क्षमता विकसित होगी। इससे उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के साथ उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली सहित अपर यमुना बेसिन को दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है।

धामी ने कहा कि किशाऊ परियोजना अंतरराज्यीय सहयोग और सहकारी संघवाद का भी महत्वपूर्ण उदाहरण है। केंद्र और राज्यों के सामूहिक प्रयासों से वर्षों से लंबित परियोजना अब निर्णायक चरण की ओर बढ़ रही है।

प्रभावित परिवारों का सम्मानजनक पुनर्वास प्राथमिकता: धामी

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि परियोजना से प्रभावित परिवारों का उचित, संवेदनशील और सम्मानजनक पुनर्वास उत्तराखंड सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी। विकास के साथ प्रभावित लोगों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जाएगी।

उन्होंने बताया कि परियोजना के लिए करीब 2500 हेक्टेयर वन भूमि के हस्तांतरण की आवश्यकता होगी। इसके कारण क्षतिपूरक वनीकरण के लिए बड़ी मात्रा में भूमि की जरूरत पड़ेगी। उत्तराखंड की पर्वतीय और वनाच्छादित परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने केंद्र सरकार और सहभागी राज्यों से इसके लिए आवश्यक भूमि चिन्हित करने में सहयोग का अनुरोध किया।

‘विकल्प रहित संकल्प’ के साथ आगे बढ़ेगी परियोजना

मुख्यमंत्री धामी ने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और अमित शाह के मार्गदर्शन में सभी सहभागी राज्य किशाऊ परियोजना को समयबद्ध तरीके से धरातल पर उतारने के अपने ‘विकल्प रहित संकल्प’ को पूरा करेंगे।

उन्होंने कहा कि MoU पर हस्ताक्षर महज औपचारिकता नहीं, बल्कि ऐसी परियोजना के क्रियान्वयन का ऐतिहासिक पड़ाव है, जिसका लाभ आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचेगा। परियोजना से जल उपलब्धता, सिंचाई, पेयजल, ऊर्जा उत्पादन और यमुना के पुनर्जीवीकरण को नई गति मिलने के साथ अपर यमुना बेसिन के राज्यों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सहित केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

Tags: Uttarakhand News
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