• About us
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • Terms & Conditions
  • Child Safety Policy
  • Contact
24 Ghante Latest Hindi News
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • छत्तीसगढ़
    • हरियाणा
    • राजस्थान
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • छत्तीसगढ़
    • हरियाणा
    • राजस्थान
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
No Result
View All Result

लोक अदालतों को तलाक देने का अधिकार नहीं, हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

Writer D by Writer D
01/06/2026
in Main Slider, उत्तर प्रदेश, राजनीति, लखनऊ
0
Divorce

Divorce

14
SHARES
176
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterShare on Whatsapp

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण कानूनी फैसले में स्पष्ट किया है कि लोक अदालत या जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों (DLSA) को वैवाहिक विवादों में तलाक (Divorce) की डिक्री देने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। उच्च न्यायालय ने साफ शब्दों में कहा कि विवाह विच्छेद (तलाक) की डिक्री पारित करने का अनन्य क्षेत्राधिकार केवल और केवल परिवार न्यायालय (Family Court) के पास सुरक्षित है। लोक अदालतें केवल पक्षकारों के बीच आपसी समझौता या सुलह कराने का माध्यम हैं, उन्हें नियमित अदालतों की तरह न्यायिक निर्णय सुनाने की शक्ति प्राप्त नहीं है।

अधिकार क्षेत्र के अतिक्रमण पर हाईकोर्ट की सख्त नाराजगी:

न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति ए.के. चौधरी की खंडपीठ ने यह ऐतिहासिक फैसला एक पीड़ित महिला द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुनाया। महिला ने वर्ष दो हजार अठारह में उन्नाव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा पारित एक आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें हुए समझौते को उसके पति ने अंतिम तलाक (Divorce) मान लिया था और उसी को आधार बनाकर दूसरा विवाह कर लिया था। इस पर गंभीर नाराजगी जताते हुए खंडपीठ ने कहा कि जब कानून स्वयं लोक अदालत को तलाक देने से स्पष्ट रूप से रोकता है, तो विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा ऐसा आदेश पारित करना सीधे तौर पर अपने अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण और कानून का उल्लंघन है।

कानूनी प्रावधान और समझौते में ‘पुनर्विवाह’ की शर्त अवैध:

न्यायालय ने विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम उन्नीस सौ सतासी तथा राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (लोक अदालत) विनियम दो हजार नौ का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि तलाक जैसे संवेदनशील मामलों को अंतिम निर्णय के लिए लोक अदालत में कतई नहीं भेजा जा सकता। हाईकोर्ट ने आदेश में रेखांकित किया कि लोक अदालत के समक्ष हुए किसी समझौते में यह उल्लेख करना कि दोनों पक्ष अब पुनर्विवाह के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं, कानूनन पूरी तरह अस्वीकार्य, शून्य और अवैध है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चूंकि दोनों पक्षों के बीच आज तक किसी सक्षम परिवार न्यायालय द्वारा विधिवत तलाक की डिक्री पारित नहीं की गई है, इसलिए पति द्वारा उस समझौते को वैधानिक तलाक मानना विधि सम्मत नहीं है।

भविष्य के लिए गाइडलाइंस जारी, लोक अदालतें सीमाओं में रहें:

मामले का पूरी तरह निस्तारण करते हुए हाईकोर्ट ने याची महिला को कानून के दायरे में रहकर अपने अधिकारों के लिए उचित कानूनी कार्रवाई करने की पूरी स्वतंत्रता प्रदान की है। इसके साथ ही, अदालत ने इस आदेश की एक-एक प्रति उत्तर प्रदेश की सभी लोक अदालतों और जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों को भविष्य में कड़ाई से अनुपालन और मार्गदर्शन के लिए भेजने का निर्देश दिया है। उच्च न्यायालय ने अपने फैसले के अंत में यह संदेश भी दिया कि लोक अदालतें देश में त्वरित और सुलभ न्याय व्यवस्था का एक बेहद महत्वपूर्ण व सराहनीय माध्यम हैं, लेकिन उन्हें हमेशा अपने अधिकार क्षेत्र की वैधानिक सीमाओं में रहकर ही कार्य करना चाहिए और नियमित अदालतों के लिए आरक्षित न्यायिक क्षेत्रों में हस्तक्षेप करने से बचना चाहिए।

Tags: DivorcehighcourtLucknow Newsup news
Previous Post

महंगाई का डबल झटका: 19 किलो के बाद अब 5 KG वाले सिलेंडर के दाम भी उछले

Next Post

राष्ट्रपति 12 जून को पहुंचेंगी देहरादून, आईएमए की 13 की पासिंग आउटपरेड में होंगी शामिल

Writer D

Writer D

Related Posts

cm dhami
राजनीति

नीति घाटी को धामी की बड़ी सौगात, बॉर्डर टूरिज्म और होम स्टे विकास को मिलेगा बढ़ावा

01/06/2026
CM Yogi
उत्तर प्रदेश

योगी सरकार चलाएगी राष्ट्रचेतना का महाभियान, देश के अमर नायकों की कथा का होगा मंचन

01/06/2026
CM Vishnudev Sai
Main Slider

वर्षों तक विकास से वंचित रहे क्षेत्र में अब विकास की नई गाथा लिखी जा रही है : मुख्यमंत्री साय

01/06/2026
Meritorious students are the future builders of the country: Keshav Maurya
उत्तर प्रदेश

मेधावी छात्र ही देश के भविष्य निर्माता: केशव प्रसाद मौर्य

01/06/2026
AK Sharma
उत्तर प्रदेश

ए.के. शर्मा के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने रचा इतिहास, पीएम सूर्यघर पर मिला उत्कृष्टता पुरस्कार

01/06/2026
Next Post
Draupadi Murmu

राष्ट्रपति 12 जून को पहुंचेंगी देहरादून, आईएमए की 13 की पासिंग आउटपरेड में होंगी शामिल

यह भी पढ़ें

murder

चार दिन से गायब युवक का शव बरामद, परिजनों ने लगाय हत्या का आरोप

15/11/2021
GDP

चालू वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था में 9 फीसद गिरावट का अनुमान

14/09/2020
राहुल गांधी rahul-gandhi

मोदी सरकार सिर्फ वादा करती है, रोजगार समस्या के समाधान में है फेल : राहुल गांधी

05/11/2020
Facebook Twitter Youtube

© 2022 24घंटेऑनलाइन

  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • छत्तीसगढ़
    • हरियाणा
    • राजस्थान
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म

© 2022 24घंटेऑनलाइन

Go to mobile version