आरा: बिहार के भोजपुर में भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर (Bharat Tiwari Encounter) मामले में आरा सीजेएम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने एनकाउंटर में शामिल बताए जा रहे 11 लोगों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है। कोर्ट ने सभी आरोपियों को 12 अगस्त तक गिरफ्तार कर पेश करने का आदेश दिया है।
पुलिस अधिकारियों पर भी आरोप
मामले में तत्कालीन एसडीएम संजीत कुमार, तत्कालीन एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा, शाहपुर थाने के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार, दरोगा अंकित आर्यन समेत कई पुलिसकर्मियों और एसटीएफ जवानों के नाम सामने आए हैं। इनमें एसटीएफ जवान अक्षय कुमार पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं।
याचिका पर कोर्ट का आदेश
अधिवक्ता संजीव कुमार के मुताबिक, आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करने के लिए अदालत में याचिका दाखिल की गई थी। इसमें अब तक हुई कार्रवाई, जांच रिपोर्ट और प्राथमिकी से जुड़ी जानकारी मांगी गई थी। कोर्ट के आदेश के बाद अब पुलिस को आरोपियों की गिरफ्तारी कर उन्हें अदालत में पेश करना होगा।
12 अगस्त तक गिरफ्तारी की चुनौती
गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद पुलिस के सामने सभी आरोपियों को तय समयसीमा में तलाशकर गिरफ्तार करने की चुनौती है। अदालत ने 12 अगस्त को सभी संबंधित आरोपियों को पेश करने का निर्देश दिया है।
फेसबुक लाइव से सुर्खियों में आया था मामला
भरत भूषण तिवारी ने 15 जून की सुबह फेसबुक लाइव कर खुद को निर्दोष बताया था। वीडियो में उसके सामने पुलिस और एसटीएफ की टीम नजर आ रही थी। भरत ने दावा किया था कि वह अपराधी नहीं है और पुलिस उसे पकड़ने पहुंची है।
पुलिस के मुताबिक, फेसबुक लाइव खत्म होने के बाद भरत ने दोबारा हथियार उठाकर फायरिंग की कोशिश की। इसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसके पैरों में गोली लगी। एनकाउंटर की परिस्थितियों और आरोपों की जांच अब अदालत की निगरानी में आगे बढ़ रही है।









