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बाबा केदारनाथ जाने वाले ध्यान दें! वापसी पर अनिवार्य हुआ यह जरूरी काम

Writer D by Writer D
04/06/2026
in Main Slider, उत्तराखंड, राजनीति, राष्ट्रीय
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Kedarnath Dham

Kedarnath Dham

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11 हजार फीट से ज्यादा की ऊंचाई पर बर्फ की सफेद चादरों से ढके पहाड़ों के बीच बाबा केदारनाथ (Kedarnath) का धाम स्थित है। हर साल लाखों श्रद्धालु यहां जीवनभर की खूबसूरत यादें संजोने पहुंचते हैं, लेकिन उनके लौटने के बाद पीछे पहाड़ों पर प्लास्टिक की बोतलें, चिप्स के पैकेट, टॉफी के रैपर और टनों सूखा कचरा रह जाता है। यह बेहद संवेदनशील हिमालयी इकोसिस्टम के लिए एक गंभीर खतरा बन चुका है। समुद्र तल से लगभग 3,584 मीटर (11,755 फीट) की ऊंचाई पर स्थित होने के कारण यहां से कचरा इकट्ठा करना, अलग करना और नीचे लाना मैदानी इलाकों जितना आसान नहीं होता। इसी परेशानी से निपटने के लिए प्रशासन ने अब एक अनोखी पहल करते हुए “कैरी मी बैक” (Carry Me Back) पॉलिसी की शुरुआत की है, जिसके तहत यात्रियों को अपना सूखा कचरा खुद वापस नीचे गौरीकुंड तक लाना होगा।

RTI के आंकड़ों में कचरे का बढ़ता बोझ

साल 2025 में केदारनाथ धाम (Kedarnath Dham) में रिकॉर्ड करीब १७.६ लाख श्रद्धालुओं ने बाबा केदार के दर्शन किए। इस भारी संख्या का सीधा और चिंताजनक असर वहां के पर्यावरण पर देखने को मिला है। एक आरटीआई (RTI) से सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, 2025 के यात्रा सीजन में केदारनाथ में 21.4 मीट्रिक टन ठोस कचरा पैदा हुआ, जो 2024 की तुलना में लगभग 22फीसदी अधिक था। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इस कचरे का एक बड़ा हिस्सा समय पर प्रोसेस (निस्तारित) नहीं हो सका।

इसके अलावा, 2022 से 2024 के बीच भी इस क्षेत्र में 72 टन से ज्यादा कचरा जमा हुआ था, जिसमें भारी मात्रा में प्लास्टिक और गैर-बायोडिग्रेडेबल (न गलने वाला) कचरा शामिल था। देवभूमि पर आस्था के साथ बढ़ रहे कचरे के इस बोझ को देखते हुए पर्यावरणविद लंबे समय से यात्रियों से जिम्मेदारी उठाने की अपील कर रहे थे।

कैसे काम करेगी यह नई व्यवस्था?

इस ‘कैरी मी बैक’ योजना के तहत नगर पंचायत द्वारा श्रद्धालुओं को 400 से 500 ग्राम क्षमता के दो विशेष बैग दिए जाएंगे, जिनमें उन्हें अपना सूखा कूड़ा एकत्र करना होगा। श्रद्धालुओं को यात्रा पूरी कर लौटते समय इन बैग्स को वापस नीचे गौरीकुंड तक साथ लेकर आना है। गौरीकुंड पहुंचने पर स्वजल विभाग और उसकी सहयोगी संस्थाएं यात्रियों से यह कूड़ा एकत्र करेंगी। इसके बाद, ‘सुलभ इंटरनेशनल’ के वैज्ञानिक पर्यावरण के तय नियमों और पहाड़ की भौगोलिक स्थिति के हिसाब से इस कूड़े का वैज्ञानिक और अंतिम निस्तारण करेंगे।

यह योजना तभी पूरी तरह कामयाब हो सकती है जब श्रद्धालु इसे केवल एक सरकारी नियम न मानकर अपनी नैतिक जिम्मेदारी समझें, ताकि केदारनाथ की यात्रा आध्यात्मिक होने के साथ-साथ पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार भी बन सके।

Tags: chardham yatra 2026Kedarnath dhamUttarakhand News
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