उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी और आंधी-बारिश के बीच बिजली उपभोक्ताओं और सरकार के लिए एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम की अलग-अलग प्लांटों में स्थित कुल 9 बड़ी उत्पादन इकाइयां (यूनिट्स) अचानक ठप हो गई हैं। इसके चलते राज्य में सरकारी क्षेत्र का बिजली उत्पादन (Power Supply) महज चार दिनों के भीतर 7106 मेगावाट से घटकर सिर्फ 3733 मेगावाट रह गया है। यानी प्रदेश के कोटे में सीधे तौर पर 3373 मेगावाट बिजली का उत्पादन कम हो गया है, जिसने राज्य की बिजली व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है।
आंधी-बारिश और तकनीकी खराबी बनी वजह:
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, पिछले तीन-चार दिनों में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में आई तेज आंधी और भारी बारिश के कारण पावर प्लांट्स और ट्रांसमिशन लाइनों (बिजली सप्लाई तारों) में गंभीर तकनीकी खामियां आ गईं। कहीं बॉयलर ट्यूब लीकेज तो कहीं ग्रिड और ट्रांसमिशन में आई गड़बड़ी के कारण इन इकाइयों को इमरजेंसी में बंद करना पड़ा है। हालांकि, गनीमत यह रही कि बारिश होने की वजह से मौसम थोड़ा ठंडा हुआ है और बिजली की कुल मांग (डिमांड) में गिरावट आई है, अन्यथा राज्य भर के उपभोक्ताओं को भीषण बिजली कटौती (पावर कट) और त्राहि-त्राहि का सामना करना पड़ता।
ये 9 इकाइयां पूरी तरह हैं बंद
विद्युत उत्पादन निगम की बंद होने वाली प्रमुख इकाइयों में प्रदेश के अलग-अलग जिलों के बड़े प्लांट्स शामिल हैं:
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अनपरा (सोनभद्र): यूनिट नंबर दो
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घाटमपुर (कानपुर): यूनिट नंबर दो
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हरदुआगंज (अलीगढ़): यूनिट नंबर सात
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जवाहरपुर (एटा): यूनिट नंबर दो
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ओबरा (सोनभद्र): यूनिट नंबर नौ
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पारीक्षा (झांसी): यहाँ सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है, जहाँ की चार इकाइयां— यूनिट नंबर तीन, चार, पांच और छह पूरी तरह बंद हैं।
चार दिनों में कैसे धड़ाम हुआ बिजली उत्पादन (आंकड़े)
निगम से मिलने वाले आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, हर दिन के साथ बिजली उत्पादन का ग्राफ लगातार नीचे गिरता चला गया:
| तारीख | बिजली उत्पादन (मेगावाट में) |
| 25 मई | 7106 मेगावाट |
| 26 मई | 6224 मेगावाट |
| 27 मई | 6125 मेगावाट |
| 28 मई | 5440 मेगावाट |
| 29 मई (शुक्रवार) | 3733 मेगावाट |
ठीक करने में जुटी अभियंताओं (इंजीनियर्स) की टीम:
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम की राज्य में कुल 6 प्रमुख स्थानों पर 25 उत्पादन इकाइयां संचालित हैं, जिनकी कुल स्थापित क्षमता 13,000 मेगावाट से अधिक है। सूबे की योगी सरकार लगातार इन उत्पादन इकाइयों की क्षमता बढ़ाने और नए प्लांट्स शुरू करने का प्रयास कर रही है, लेकिन इस अप्रत्याशित तकनीकी संकट ने उत्पादन को करीब आधा कर दिया है। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन और उत्पादन निगम के मुख्य अभियंताओं व तकनीकी विशेषज्ञों की टीमें सभी बंद प्लांटों में चौबेसों घंटे डटी हुई हैं, ताकि युद्धस्तर पर मरम्मत कार्य पूरा कर इन ठप इकाइयों को जल्द से जल्द दोबारा चालू (लाइट-अप) किया जा सके।









