लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर प्रदेश में ईवीएम-वीवीपैट की एफएलसी की तैयारी तेज हो गयी हैं। एफएलसी की प्रक्रिया निर्धारित मानकों और पूरी पारदर्शिता के साथ कराने पर जोर दिया जा रहा है। इसके हर चरण की जानकारी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को दी जाएगी और उनकी सहभागिता भी सुनिश्चित की जाएगी।
निर्वाचन आयोग की कोशिश है कि इस प्रक्रिया में अधिक से अधिक राजनीतिक दलों को शामिल किया जाए। एफएलसी में गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए लखनऊ में साेमवार काे एक दिवसीय कार्यशाला में निर्वाचन अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
भारत निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त मनीष गर्ग एवं उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा की विशेष उपस्थिति इस कार्यशाला में है। राजधानी लखनऊ में सोमवार को जिला निर्वाचन अधिकारियों, उप जिला निर्वाचन अधिकारियों और एफएलसी सुपरवाइजरों की एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की जा रही है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रदेश के 33 जनपदों के निर्वाचन अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आज सुबह 10 बजे से 4 बजे तक रूपाम (डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी) सुल्तानपुर रोड, लखनऊ में चल रहा है।
निर्वाचन आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि लखनऊ में हो रही इस कार्यशाला में सात मंडलों—लखनऊ, कानपुर, मुरादाबाद, झांसी, चित्रकूट, अयोध्या एवं देवीपाटन के जिला निर्वाचन अधिकारी शामिल हुए हैं।
गौतमबुद्ध नगर और वाराणसी में भी हो चुका प्रशिक्षण
गौतमबुद्ध नगर में 21 और वाराणसी में 21 जनपदों के अधिकारियों को पहले ही प्रशिक्षण दिया जा चुका है। उन्होंने बताया कि एफएलसी के दौरान तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के साथ भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का अनुपालन कराया जाएगा। निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव के लिए ईवीएम-वीवीपैट की एफएलसी पर विशेष जोर दिया जा रहा है।








