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संवैधानिक संस्था में सामान्य नागरिक का विश्वास ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकतः मुख्यमंत्री

Writer D by Writer D
14/09/2026
in उत्तर प्रदेश, लखनऊ
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लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि संवैधानिक संस्था में सामान्य नागरिक का विश्वास ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है। जो संस्था आमजन के विश्वास पर खरा उतरेगी, लोकतंत्र में उसे आगे बढ़ने से कोई रोक नहीं सकता और न ही कोई उसके महत्व को कम करके आंक सकता है। गुड गवर्नेंस पब्लिक ट्रस्ट पर निर्भर करता है। यदि जनता का विश्वास नहीं है तो हम सुशासन के लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकते। इसे प्राप्त करने के लिए आवश्यक है कि अंतिम पायदान पर बैठा व्यक्ति भी संवैधानिक संस्थाओं पर विश्वास के साथ गौरव की अनुभूति कर सके।

मुख्यमंत्री सोमवार को बतौर मुख्य अतिथि लोक आयुक्त संगठन के 50वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने लोक आयुक्त प्रशासन की स्मारिका व सूचना पुस्तिका का विमोचन किया। साथ ही 50 वर्षों की उपलब्धियों पर आधारित प्रदर्शनी व लघु फिल्म भी देखी।

जनविश्वास पर खरा उतरना ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी कसौटी

सीएम ने कहा कि संस्था के गठन मात्र से समस्या का समाधान नहीं होता। जन-विश्वास पर खरा उतरना ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी कसौटी है। संविधान निर्माताओं ने भारत की व्यवस्था के लिए संसदीय लोकतंत्र दिया। यदि जनप्रतिनिधि ने विश्वास खोया तो सरकार गई। हर पांच साल में उन्हें जनता के बीच जाना पड़ता है। यदि जनप्रतिनिधि जनभावना का सम्मान नहीं कर पाता है तो जनता को पूरा अधिकार है कि वह प्रतिनिधि को बदलकर दूसरों को मौका दे।

सत्य की कसौटी है न्याय का आधार

सीएम ने कहा कि संविधान निर्माताओं ने न्याय, सत्य और समता को भारत की मौलिक आवश्यकता बताते हुए उल्लेख किया कि हर व्यक्ति को न्याय पाने का अधिकार है। न्याय का आधार सत्य की कसौटी है। हर व्यक्ति को बिना भेदभाव समभाव से देखा जाए। शिकायत का मेरिट के आधार पर समाधान और शिकायतकर्ता की संतुष्टि पर जोर होना चाहिए।

अनावश्यक शिकायत करने वालों पर कसना होगा शिकंजा

सीएम ने कहा कि आईजीआरएस, सीएम हेल्पलाइन, जनता दर्शन आदि के जरिये जनसमस्याओं का समयबद्ध समाधान कराया जाता है। हालांकि कुछ लोग अनावश्यक शिकायत भी लेकर आते हैं, बताते हैं कि मेरी व्यक्तिगत समस्या नहीं है, लेकिन किसी के खिलाफ शिकायत करनी है। यदि हम प्रमाण मांगते हैं तो आनाकानी भी होती है। एक अनुभव साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एक सज्जन ने एक विद्यालय के खिलाफ शिकायत की। जांच में शिकायत झूठी निकली तो उन्होंने कहा कि पूरे जिले के विद्यालयों की जांच की जाए। ऐसी झूठी शिकायतों को खारिज किया जाना चाहिए। ऐसी शिकायतें सिस्टम का और न्याय पाने के अभिलाषी ईमानदार व्यक्ति का समय खराब करती हैं। शिकायत प्रणाली का दुरुपयोग करने वाले तत्वों से दूरी बनानी चाहिए। किसी संस्था को विश्वास के प्रतीक के रूप में स्थापित करने के लिए आवश्यक है कि अंतिम पायदान पर बैठा व्यक्ति भी गर्व व गरिमा के साथ विश्वास व्यक्त करे कि मेरी समस्या का समाधान होगा। संस्थाओं को मिले अधिकारों का दुरुपयोग न हो, इसे ध्यान में रखकर मेरिट तय हो और अनावश्यक शिकायत करने वालों पर शिकंजा भी कसा जाए।

तकनीक के कारण अब पीडीएस की शिकायत नहीं

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोक आयुक्त संगठन ने टेक्नोलॉजी का बेहतर उपयोग किया है। उन्होंने बताया कि 2017 में पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (पीडीएस) में सबसे अधिक शिकायत खाद्यान्न वितरण की आती थी। जनता दर्शन में 100 में से 60 शिकायतें पीडीएस की होती थी। इससे परेशान होकर लगातार हम बैठक करते थे, फिर हमने तकनीक का प्रयोग किया। ई-पॉस मशीन लगाकर उसे मुख्यालय पर स्क्रीन लगाकर जोड़ दिया। इसके बाद यदि 80 हजार राशन कोटे की दुकानों में किसी ने कुछ इधर-उधर किया तो तुरंत अलर्ट आ जाता है। इससे हेराफेरी की गुंजाइश शून्य हो गई। आज जनता दर्शन में 500 लोग आते हैं, लेकिन एक भी शिकायत इससे जुड़ी नहीं होती। सरकार बिना भेदभाव 16 करोड़ लोगों को राशन दे रही है। सिंगल डिलीवरी के मामले भी सुनिश्चित किए गए हैं। अब एफसीआई गोदाम से ट्रक को गंतव्य तक पहुंचने के दौरान उसे ट्रैक भी किया जाता है। अब राशन वितरण भी समुचित ढंग से होता है।

साढ़े 9 साल में 34 लाख राजस्व मामलों का निस्तारण

सीएम ने राजस्व विभाग के मामलों का भी जिक्र किया। कहा कि 2017 में भूमि संबंधी विवाद, पैमाइश, वरासत, नामांतरण से जुड़े 34 लाख मामले लंबित थे। इससे अनावश्यक विवाद होते थे। केवल वरासत से जुड़े लगभग छह लाख मामले लंबित थे। सभी के निस्तारण की समयसीमा तय की गई। तय किया गया कि लैंड यूज की समस्या का समाधान 30 दिन में नहीं हुआ तो इसे डीम्ड मान लिया जाएगा यानी गलत होने पर निस्तारण करने वाले की जवाबदेही तय होगी। साढ़े 9 साल में 34 लाख मामले का निस्तारण हुआ, लेकिन 9 साल में 9 लाख और मामले भी सामने आए। वरासत, पैमाइश आदि की समस्याओं का समाधान किया गया।

हर तहसील में दिया गया रोबोट

सीएम ने कहा कि पैमाइश में शिकायत मिली कि लेखपाल ने जरीब में थोड़ा इधर-उधर कर दिया है। अब इस समस्या का भी समाधान हो गया। इसके लिए हर तहसील में रोबोट दे दिया है। इतनी पारदर्शिता हुई कि एक इंच भी कोई इधर-उधर नहीं कर सकता। अब तकनीक के माध्यम से पैमाइश का समाधान होगा, कोऑर्डिनेट के आधार पर हर व्यक्ति को उसकी जमीन उपलब्ध कराएंगे।

टेक्नोलॉजी दिलाएगी शिकायतों के अंबार से मुक्ति

सीएम ने कहा कि टेक्नोलॉजी का उपयोग कर शिकायतों के अंबार का समाधान निकाल सकते हैं। ऐसे प्रयास जनविश्वास के प्रतीक बनेंगे। हो सकता है कि लोकसेवक को बचाने का प्रयास होता है, लेकिन शिकायत जब लोक आयुक्त संगठन के पास जाती है तो वह मेरिट के आधार पर समाधान निकालता है। कई बार जब व्यक्ति को ताकत मिलती है तो वह उदंडतापूर्ण व्यवहार करने लगता है, उस पर अंकुश जरूरी है। लोकसेवक के लिए आवश्यक है कि उसे मूल्यों की रक्षा के अहसास और नैतिकता के साथ जोड़ा जाए। संविधान के निर्माण के पीछे निर्माताओं का यही भाव था।

यूपी में 14 सितंबर 1977 को गठित हुआ लोक आयुक्त संगठन

सीएम ने कहा कि आजादी के बाद लगा होगा कि आने वाले समय में नेतृत्व देने वाले लोग ही व्यवस्था में गदर मचा डालेंगे, तब इमरजेंसी के तत्काल बाद बनी पहली सरकार ने लोक आयुक्त संगठन के निर्माण की तरफ कदम बढ़ाए। उत्तर प्रदेश में लोक आयुक्त संगठन का विधिवत कार्य 14 सितंबर 1977 को प्रारंभ हुआ। उस समय न्यायमूर्ति विशंभर दयाल ने उत्तर प्रदेश लोक आयुक्त संगठन को नेतृत्व प्रदान किया था। तबसे प्रारंभ हुई संगठन की यह यात्रा न्यायमूर्ति संजय मिश्र के नेतृत्व में नई पहचान, नई आभा के साथ जारी है।

विश्वास ही लोकतंत्र की असली ताकत

सीएम ने कहा कि बहुत सारी समस्याओं के समाधान को व्यवस्थित रूप से बढ़ाया गया है। 2014 में सत्ता संभालने के बाद पीएम मोदी जी ने जनधन अकाउंट खोलने की बात की तो विपक्ष ने खिल्ली उड़ाई। आज जनधन अकाउंट की ताकत सबके सामने है। सीएम ने एक पूर्व पीएम की बेचारगी का जिक्र करते हुए कहा कि अब डीबीटी के माध्यम से सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में धनराशि जाती है। विश्वास ही लोकतंत्र की असली ताकत है। लोकतंत्र जनता का, जनता के द्वारा और जनता के लिए है। इसकी असली कसौटी यही है कि जिसका जो है, उसे वह प्राप्त होना चाहिए। सीएम ने बतौर सांसद जनसेवा की भी चर्चा की। उन्होंने विधवा, निराश्रित, वृद्धजन की बेचारगी को बताते हुए 2017 के पहले मिलने वाली राशि में घूसखोरी का भी जिक्र करते हुए कहा कि अब यूपी में ऐसा नहीं है। सरकार डीबीटी के माध्यम से सीधे अकाउंट में 1.10 करोड़ लोगों को वार्षिक 12 हजार पेंशन दे रही है। व्यवस्था से बिचौलिए समाप्त कर दिए गए।

लोक कल्याण का मार्ग बने टेक्नोलॉजी

सीएम ने कहा कि शासन भी टेक्नोलॉजी का बेहतरीन उपयोग कर रहा है। एआई, डेटा एनालिसिस, साइबर सिक्योरिटी, ई-गवर्नेंस के माध्यम से प्रशासन की वास्तविक छवि जनता के सामने है। टेक्नोलॉजी लोक कल्याण का मार्ग बने, सुशासन की दिशा में उठाए जाने वाले कदम को और प्रभावी बना सके। शासन में जितनी शुचिता, पारदर्शिता व ईमानदारी होगी, उतना ही बेहतरीन परिणाम होगा। सीएम ने आश्वस्त किया कि शासन लोक आयुक्त संगठन को हर सकारात्मक सहयोग देगा।

देशभर के लोक आयुक्त को बुलाकर करें भव्य कार्यक्रम

सीएम ने संगठन से अपेक्षा जताई कि वर्तमान लोक आयुक्त के कार्यकाल के साथ ही 50 वर्ष की यात्रा का डाक्यूमेंट स्थापित करते हुए बेहतरीन प्रेजेटेंशन तैयार करें कि कितने मामले आए, कितने का निस्तारण हुआ। किन मामलों में कार्रवाई हुई। साथ ही देशभर के लोक आयुक्त को बुलाकर भव्य कार्यक्रम हो, उनके भी बेहतरीन कार्यों आदि की जानकारी प्राप्त हो। लोकपाल व अन्य सदस्यों को आमंत्रित करें और अलग-अलग मुद्दों को लेकर संवाद हो। संवाद लोकतंत्र की मजबूती के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। सीएम ने उम्मीद जताई कि संवाद के जरिए लोक आयुक्त संगठन आगामी 50 वर्ष की कार्ययोजना को बेहतरीन रोडमैप के साथ बढ़ाएगा।

इस दौरान लोक आयुक्त न्यायमूर्ति संजय मिश्र, उप लोक आयुक्त शंभू सिंह यादव, दिनेश कुमार सिंह, सुरेंद्र कुमार यादव, अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद, पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण आदि मौजूद रहे।

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