मोगा: पंजाब में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल (Sanitation Workers’ Strike) का असर अब आम जनजीवन पर दिखाई देने लगा है। मोगा शहर में सफाई व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर गई है। मुख्य सड़कें, बाजार और रिहायशी इलाकों में जगह-जगह कूड़े के ढेर लग गए हैं, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सफाई कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर 8 जुलाई से हड़ताल पर हैं। कर्मचारियों के काम पर नहीं लौटने के कारण शहर में गंदगी बढ़ती जा रही है और नगर प्रशासन की व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठ रहे हैं।
पक्का करने की मांग को लेकर आंदोलन
सफाई कर्मचारी यूनियन का कहना है कि सरकार ने आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित करने का वादा किया था, लेकिन अब तक उसे पूरा नहीं किया गया। यूनियन नेताओं का आरोप है कि सरकार के साथ कई दौर की बातचीत के बावजूद सिर्फ आश्वासन मिले हैं, समाधान नहीं।
यूनियन नेता सतपाल अंजान ने कहा कि इस बार कर्मचारी अपनी मांगें पूरी हुए बिना आंदोलन खत्म नहीं करेंगे। उन्होंने बताया कि सरकार के साथ बैठक प्रस्तावित है और अगर कोई सकारात्मक फैसला नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
लाठीचार्ज मामले में कार्रवाई की मांग
सफाई कर्मचारियों ने बरनाला में प्रदर्शन के दौरान हुए कथित लाठीचार्ज का भी विरोध किया है। यूनियन ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज करने की मांग उठाई है।
‘मांगें मानीं तो एक दिन में साफ कर देंगे शहर’
कर्मचारियों का कहना है कि वे जनता की परेशानियों को समझते हैं, लेकिन अपनी मांगों के समाधान के लिए हड़ताल करना उनकी मजबूरी है। उनका दावा है कि सरकार अगर उनकी मांगें स्वीकार कर लेती है तो वे कुछ ही समय में पूरे शहर की सफाई व्यवस्था दुरुस्त कर देंगे।
फिलहाल मोगा समेत पंजाब के कई शहरों में बढ़ते कूड़े के ढेर लोगों के लिए बड़ी समस्या बन गए हैं। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि समाधान नहीं होने पर आंदोलन का असर आने वाले चुनावों में भी दिखाई दे सकता है।









