लखनऊ : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi) ने सोमवार को विधानसभा के मानसून सत्र के शुभारंभ पर सभी सदस्यों का स्वागत करते हुए कहा कि विधायिका आम जनता की आवाज उठाने का सर्वोच्च मंच है और सदन के समय का उपयोग जनहित के मुद्दों पर सार्थक चर्चा के लिए किया जाना चाहिए।सत्र के पहले दिन पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि विधायिका किसान, युवा, महिला तथा समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा, समीक्षा और उनके समाधान का माध्यम है।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक जनप्रतिनिधि को अपने विधानसभा क्षेत्र की समस्याएं सदन में उठाकर उनके समाधान का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले नौ वर्षों में सरकार और जनप्रतिनिधियों के बीच संवाद की इसी परंपरा के माध्यम से प्रदेश में अनेक सकारात्मक परिवर्तन संभव हो सके हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने छह करोड़ से अधिक गरीबों के जीवन में विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से बदलाव लाने का कार्य किया है।
उन्होंने कहा कि किसानों के जीवन में सुधार लाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्ष 2007 से 2017 के दौरान अनेक चीनी मिलें बंद हुईं और किसानों के हितों की उपेक्षा की गई। उनका आरोप था कि उस समय गन्ना किसानों का भुगतान लंबित रहता था और किसान कठिन परिस्थितियों का सामना करने के लिए विवश थे।उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार किसानों की उपज की सीधी खरीद सुनिश्चित कर रही है तथा गन्ना मूल्य का भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में कराया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान और युवा सरकार की प्राथमिकता में हैं तथा उनके हितों की रक्षा के लिए लगातार कार्य किए जा रहे हैं। अयोध्या का उल्लेख करते हुए उन्होंने विपक्ष पर हमला बोला और कहा कि आज राम मंदिर के मुद्दे को वही लोग उठा रहे हैं जिन्होंने अतीत में रामभक्तों पर गोलियां चलवाईं और न्यायालय में राम मंदिर निर्माण का विरोध करने के लिए वकीलों की फौज खड़ी की थी।
मुख्यमंत्री योगी ने घोषणा की कि प्रदेश सरकार अगले एक-दो सप्ताह के भीतर आउटसोर्स सेवा आयोग (आउटसोर्स कमीशन) लागू करने जा रही है। उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए न्यूनतम सेवा मानक तय किए जाएंगे तथा उनकी कार्य व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाया जाएगा।









