• About us
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • Terms & Conditions
  • Child Safety Policy
  • Contact
24 Ghante Latest Hindi News
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
No Result
View All Result

गेहूं की तरह बोएं धान, कम होगी लागत, उपज भी होगी बराबर

Writer D by Writer D
29/05/2025
in उत्तर प्रदेश, लखनऊ
0
Sow paddy like wheat, cost will be reduced

Sow paddy like wheat, cost will be reduced

14
SHARES
176
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterShare on Whatsapp

लखनऊ। किसानों की आय बढ़ाना डबल इंजन (मोदी एवं योगी) सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसे बढ़ाने का सबसे प्रभावी जरिया है, कम लागत में अधिक उपज। केंद्र सरकार ने इसी मकसद से “विकसित कृषि संकल्प अभियान” शुरू कर रही है। उम्मीद है कि इस देश व्यापी अभियान का लाभ खरीफ के मौजूदा सीजन में ही मिलेगा। योगी सरकार भी इस अभियान को सफल बनाने के लिए जी जान से जुट गई है।

उल्लेखनीय है कि खरीफ की मुख्य फसल धान (Paddy) है। नर्सरी में तैयार पौधों को कुशलता से निकालना, इनकी रोपाई के लिए खेत की तैयारी, फसल संरक्षा के उपायों से लेकर फसल की कटाई और मड़ाई तक का काम काफी श्रमसाध्य है। स्वाभाविक है इस सबमें अच्छी खासी लागत आती है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि धान (Paddy) की फसल भी गेहूं की तरह सीधे लाइन से बोआई कर नर्सरी से लेकर पलेवा तक का खर्च बचाया जा सकता है।

जीरो सीड ड्रिल, हैप्पी सीडर से बोआई आसान भी है। यही नहीं इसके जरिए बोआई के दौरान खाद और बीज एक साथ गिरने से पौधों को खाद की उपलब्धता भी बढ़ जाती है। फसल के लाइन से उगने के कारण फसल संरक्षा के उपाय में भी आसानी होती है। यही वजह है कि योगी सरकार लाइन सोइंग के लाभों से किसानों को लगातार जागरूक कर रही है। सरकार का तो यहां तक भी प्रयास है कि जिस फसल के लाइन सोइंग उपयुक्त है उनको किसान लाइन से बोएं। जिनको बेड बनाकर बोना है उनको बेड बनाकर बोएं। इनमें उपयोग आने वाले कृषि यंत्रों पर सरकार 50% तक अनुदान भी देती है।

सीधी बोआई से प्रति हेक्टेयर 12500 रुपए घट जाती है लागत

गोरखपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) बेलीपार के प्रभारी डॉ. एस के तोमर और मनोज कुमार के मुताबिक, इस विधा से बोआई करने पर उपज में कोई फर्क नहीं पड़ता। प्रति हेक्टेयर लागत करीब 12500 रुपये घट जाती है। किसान अगर तकनीक का सही तरीके से प्रयोग करना सीख लें तो परंपरागत विधा की तुलना में अधिक उत्पादन भी संभव है।

बोआई से पहले खेत की तैयारी जरूरी

बोआई के पहले खेत की लेवलिंग जरूरी है। यह लेवलिंग अगर लेजर लेवलर से हो तो और बेहतर। समतल खेत में बीज की बोआई समान रूप से होती है। सिंचाई के दौरान पानी कम लगता है। इससे सिंचाई की भी लागत घटती है। जून का तीसरा हफ्ता बोआई का सबसे उचित समय होता है यानि धान की सीधी बोआई का सबसे उचित समय 10-20 जून के बीच होता है। बाढ़ वाले क्षेत्रों में पहले बोआई कर लें ताकि बाढ़ आने तक पौधों की जड़ें मजबूत हो जाएं और फसल को न्यूनतम क्षति हो। बेहतर जर्मिनेशन (अंकुरण) के लिए बोआई के समय खेत में पर्याप्त नमी जरूरी है।

बीज और खाद की मात्रा का अनुपात है महत्वपूर्ण

मध्यम और मोटे दाने वाले धान (Paddy) में 35 किग्रा तथा महीन धान में 25 किग्रा, संकर प्रजातियों के लिए 8 किग्रा प्रति हेक्टेयर की दर से बीज लगता है। अधिक उपज देने वाली प्रजातियों के लिए एनपीके (नाइट्रोजन,फास्फोरस एवं पोटाश) का अनुपात प्रति हेक्टेयर 150: 60: 60 किग्रा की जरूरत होती है। इसमें से बोआई के समय 130 किग्रा. डीएपी का प्रयोग करें।

खाद की बाकी मात्रा को दो या तीन हिस्सों में बांटकर हर सिंचाई के ठीक पहले या बाद में प्रयोग करें। भूमि-जनित एवं बीज जनित रोगों से बचाव के लिए प्रति किग्रा बीज को 3 ग्राम कार्बेडाजिम से उपचारित कर सकते हैं। बोआई के समय सबसे जरूरी चीज है गहराई के लिए मशीन की सेटिंग। गहराई का मानक 2 से 3 सेंटीमीटर है। अधिक गहराई पर बीज गिराने से जमाव प्रभावित होता है।

खरपतवार के नियंत्रण का रखे खास ध्यान

धान (Paddy) बारिश की फसल है। इस सीजन में खरपतवारों का बहुत प्रकोप होता है। इनका समय से सही और प्रभावी नियंत्रण न होने से फसल को बहुत क्षति होती है। इसके लिए बोआई के 24 घंटे बाद जब खेत में नमी रहे तभी पैडी मिथेलीन 30 ईसी की 3.3 लीटर मात्रा को 600 लीटर पानी में घोलकर शाम को छिड़काव करें।

जमाव के बाद, विस्पैरी बैक सोडियम (नोमिनीगोल्ड) या एडोरा की 100 मिली मात्रा प्रति एकड़ 150 लीटर पानी में घोलकर बुवाई के 25 दिन बाद छिड़काव करने से चौड़ी पत्ती वाले और घास कुल के अधिकत्तर खरपतवार नियंत्रित हो जाते हैं। मोथा के नियंत्रण के लिए इथोक्सी सल्फ्यूरान (सनराइस) 50-60 ग्राम सक्रिय तत्व को पानी में घोलकर बोआई के 25 दिन बाद छिड़काव कर सकते हैं।

Tags: krishi samachar
Previous Post

9 साल बाद RCB पहुंची फाइनल में, सॉल्ट-हेजलवुड और सुयश शर्मा ने पंजाब को धोया

Next Post

नव्या पांडे ने जु-जित्सू में रचा इतिहास, एशियन चैंपियनशिप में भारत को दिलाया स्वर्ण पदक

Writer D

Writer D

Related Posts

Rajnath Singh
उत्तर प्रदेश

बुजुर्गों की सेवा से बड़ा कोई पुण्य कार्य नहीं हो सकता: राजनाथ सिंह

29/08/2026
Passengers availed the benefit of the free bus travel facility.
उत्तर प्रदेश

रक्षाबंधन निशुल्क बस यात्रा: शनिवार शाम तक 80 लाख महिलाओं व सहयात्रियों ने उठाया सेवा का लाभ

29/08/2026
More than one lakh saplings planted on Rakshabandhan
उत्तर प्रदेश

रक्षाबंधन के पर्व पर भाई-बहनों ने लगाए एक लाख से अधिक पौधे

29/08/2026
CM Yogi conducted an aerial inspection of flood-affected villages in Ballia.
Main Slider

50-50 किलो राहत सामग्री दे रही सरकार, 500 ग्राम राहत नहीं पहुंचा पाती थी सपा: मुख्यमंत्री योगी

29/08/2026
Keshav Maurya
उत्तर प्रदेश

खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहा निवेश, युवाओं एवं महिला उद्यमियों का बढ़ा रुझान : केशव प्रसाद मौर्य

29/08/2026
Next Post
CM Dhami-Nayvya Pandey

नव्या पांडे ने जु-जित्सू में रचा इतिहास, एशियन चैंपियनशिप में भारत को दिलाया स्वर्ण पदक

यह भी पढ़ें

ajit pawar

उद्धव सरकार पर कोरोना का हमला, 10 मंत्री समेत 20 से अधिक विधायक पॉजिटिव

01/01/2022
Bike Bot Scam

बाइक बोट घोटाला : 26 आरोपियों के विरूद्ध गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई

27/06/2021
Shani Trayodashi

नए साल में इन जातकों को मिलेगी शनि से साढ़ेसाती से मुक्ति

13/12/2024
Facebook Twitter Youtube

© 2017 24घंटेऑनलाइन

  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म

© 2017 24घंटेऑनलाइन

Go to mobile version