• About us
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • Terms & Conditions
  • Child Safety Policy
  • Contact
24 Ghante Latest Hindi News
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
No Result
View All Result

Zero Tolerance Policy: तीन साल में तीस हजार मामलों में अपराधियों को मिली गुनाहों की सजा

Writer D by Writer D
11/05/2023
in उत्तर प्रदेश, लखनऊ
0
zero tolerance policy

zero tolerance policy

14
SHARES
176
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterShare on Whatsapp

लखनऊ। योगी सरकार (Yogi Government) प्रदेश में जीरो टॉलरेंस नीति (Zero Tolerance Policy) के तहत अपराध और अपराधियों की कमर तोड़ रही है। यूपी पुलिस जहां एक तरफ सीधा मुकाबला करते हुए अबतक 184 बदमाशों को ढेर कर चुकी है, वहीं एक बहुत बड़ी संख्या ऐसे अपराधियों की भी है, जिन्हें न्यायालय में पुलिस की प्रभावी पैरवी से बेदम कर दिया गया है।

यूपी पुलिस का अभियोजन निदेशालय इसमें अहम रोल अदा कर रहा है। पिछली सरकारों में जहां अभियोजन निदेशालय हाशिये पर रहता था, वहीं योगी सरकार ने इसे खास तरजीह दी है। इसी का नतीजा है कि प्रदेश के विभिन्न न्यायालयों में अभियोजन निदेशालय की प्रभावी पैरवी से पिछले तीन साल के अंदर तकरीबन 30 हजार मामलों में अपराधियों को उनके गुनाहों की सजा मिल चुकी है।

अभियोजन निदेशालय ने बनाया रिकॉर्ड

अभियोजन निदेशालय के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2020 से 2022 तक पॉक्सो एक्ट में 4078, रेप के केस में 1218, क्राइम अगेंस्ट वूमेन एंड चिल्ड्रेन केस में 8646, हत्या के केस में 2387, दहेज हत्या के केस में 1152, लूट के केस में 1141, गोवंश हत्या के केस में 279 और आर्म्स एक्ट के केस में 10520 मामलों में सजा दिलायी गई है। अभियोजन निदेशालय की ओर से रिकॉर्ड स्तर पर अपराधियों को उनके किये की सजा दिलाने के लिए कई अवार्ड भी मिल चुके हैं।

पॉक्सो एक्ट में 332 प्रतिशत के रेशियो से दिलाई गई सजा

अभियोजन निदेशालय के एडीजी आशुतोष पांडेय ने बताया कि पिछले तीन साल में कोर्ट में प्रभावी पैरवी और शत-प्रतिशत गवाहों की गवाही कराकर अपराधियों को सजा दिलाने में शानदार प्रदर्शन किया है। निदेशालय ने कोर्ट में प्रभावी पैरवी के जरिये वर्ष 2020 में पॉक्सो के तहत जहां 535 मामलों में सजा दिलायी, वहीं वर्ष 2022 में 2313 मामलों में सजा दिलायी गई, जिसका रेशियो वर्ष 2020 के मुकाबले वर्ष 2022 में 332 प्रतिशत अधिक रहा।

इसी तरह रेप के मामले में वर्ष 2020 में 177 मामलों में सजा दिलाई गई, तो वहीं वर्ष 2022 में 671 मामलों में सजा दिलाई गई, जिसका रेशियो वर्ष 2020 के मुकाबले 2022 में 280 प्रतिशत अधिक रहा है। इसी प्रकार क्राइम अगेंस्ट वूमेन एंड चिल्ड्रेन के मामलों में वर्ष 2020 में 1048 मामलों में सजा दिलाई गई जबकि वर्ष 2022 में 5351 मामलों में सजा दिलायी गई, जिसका रेशियो वर्ष 2020 के मुकाबले वर्ष 2022 में 411 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

हत्या के केस में वर्ष 2020 में 420 मामलों जबकि 2022 में 1180 मामलों में सजा दिलायी गई, जिसका रेशियो वर्ष 2020 के मुकाबले वर्ष 2022 में अपराधियों को सजा दिलाने में 181 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

तीन वर्ष में आर्म्स एक्ट में सबसे अधिक दिलायी गई सजा

अभियोजन निदेशालय ने दहेज हत्या के केस में वर्ष 2020 में 182 मामलों जबकि वर्ष 2022 में 572 मामलों में सजा दिलायी गई। इसी तरह लूट के केस में वर्ष 2020 में 177 मामलों जबकि वर्ष 2022 में 745 मामलों में सजा दिलायी गई, जिसका रेशियो वर्ष 2020 के मुकाबले वर्ष 2022 में 321 प्रतिशत अधिक रहा।

नेपाल के पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह ने मुख्यमंत्री योगी से लखनऊ में की मुलाकात

वहीं गोवंश के मामले में जहां वर्ष 2020 में 29 मामलों तो वर्ष 2022 में 200 मामलों में सजा दिलायी गई। वहीं सबसे अधिक पिछले तीन वर्ष में सबसे अधिक आर्म्स एक्ट के मामलों में सजा दिलायी गई। आर्म्स एक्ट के मामले में वर्ष 2020 में 1960 मामलों जबकि वर्ष 2022 में 6373 मामलों में सजा दिलायी गई, जिसका रेशियो वर्ष 2020 के मुकाबले वर्ष 2022 में 225 प्रतिशत अधिक रहा।

मिले चुके हैं कई अवार्ड

अभियोजन निदेशालय को पूरे देश में कम समय में अपराधियों को सजा दिलाने, ई ऑफिस और ई प्रॉसीक्यूशन पोर्टल पर देश में अच्छा प्रदर्शन करने पर अवार्ड, प्रमाण पत्र से सम्मानित किया गया है। अभियोजन निदेशालय के एडीजी आशुतोष पांडेय ने बताया कि वर्ष 2021 में भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने आईसीजेएस सिस्टम के तहत नेशनल क्राइम रिपोर्ट ब्यूरो की ओर से देश में उत्तर प्रदेश को अभियोजन कार्य के लिए अवार्ड दिया था।

यह अवार्ड वर्ष 2022 में भी उत्तर प्रदेश के अभियोजन निदेशालय को दिया गया। इसी तरह ई प्रॉसीक्यूशन के लिए वर्ष 2022 में स्कॉच अवार्ड से सम्मानित किया गया।

Tags: Lucknow Newsup newsYogi GovernmentYogi NewsZero tolerance policy
Previous Post

नेपाल के पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह ने मुख्यमंत्री योगी से लखनऊ में की मुलाकात

Next Post

Nikay Chunav: फर्जी मतदान के आरोप में 100 लोग हिरासत में

Writer D

Writer D

Related Posts

CM Yogi
Main Slider

विकास के लिए प्रदेश का कोना-कोना मथ रहे मुख्यमंत्री योगी, अनवरत पांचवें महीने सहारनपुर पहुंचे

01/07/2026
VB-G Ram Ji Act implemented
उत्तर प्रदेश

वीबी-जी राम जी एक्ट लागू होने से यूपी के मजदूरों को हर रोज मिलेंगे न्यूनतम 300 रुपये

01/07/2026
Katarniaghat
उत्तर प्रदेश

पर्यटन सत्र 2025-26 में 12 हजार से अधिक पर्यटकों ने किया कतर्नियाघाट का दीदार

01/07/2026
CM Yogi launches 'Digi Rover' special campaign
उत्तर प्रदेश

तकनीक के माध्यम से भूमि की पैमाइश पहले की तुलना में अधिक सटीक, पारदर्शी और विश्वसनीय होगी : सीएम योगी

01/07/2026
yogi-modi
उत्तर प्रदेश

कानपुर-कबरई ग्रीनफील्ड हाईवे को मंजूरी मिलने पर सीएम योगी ने पीएम मोदी का जताया आभार

01/07/2026
Next Post
fake voting

Nikay Chunav: फर्जी मतदान के आरोप में 100 लोग हिरासत में

यह भी पढ़ें

Anant Singh

चली गई बाहुबली अनंत सिंह की विधायकी, विधासभा सचिवालय ने जारी किया आदेश

15/07/2022
Mukhtar Ansari

बाहुबली मुख्तार अंसारी को बड़ा झटका, इस मामले में आजीवन कारावास

13/03/2024
Rajarshi Tandon University

विनय कुमार बने राजर्षि टंडन विवि के कुल सचिव

02/02/2023
Facebook Twitter Youtube

© 2017 24घंटेऑनलाइन

  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म

© 2017 24घंटेऑनलाइन

Go to mobile version