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यूपी बना 85 फीसदी सीवेज का शोधन करने में सक्षम राज्य

Writer D by Writer D
02/03/2026
in उत्तर प्रदेश, राजनीति, लखनऊ
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Sewage

Sewage

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश को स्वच्छ प्रदेश बनाने की मुहिम समय के साथ तेज होती जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार अपशिष्ट जल को ‘आर्थिक संपत्ति’ में बदलने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। प्रतिदिन 4500 मिलियन लीटर से अधिक सीवेज (Sweage) का शोधन किया जा रहा है। इस तरह प्रदेश अब लगभग 85 प्रतिशत गंदे पानी को उपचारित करने में सफल है। सरकार गंगा-यमुना समेत राज्य की तमाम नदियों की पवित्रता को बनाए रखने के लिए हरसंभव कदम उठा रही है।

नमामि गंगे मिशन से मिली सीवरेज सिस्टम (Sewage System) को मजबूती-

उल्लेखनीय है कि नमामि गंगे मिशन के दूसरे चरण ने प्रदेश के सीवरेज सिस्टम (Sweage System) को नई मजबूती दी है। उत्तर प्रदेश में अब तक 74 सीवर शोधन परियोजनाएं स्वीकृत की जा चुकी हैं, जिनमें से 41 पूरी होकर संचालन में भी आ चुकी हैं। शेष परियोजनाओं पर तेजी से कार्य जारी है। राज्य भर में 155 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) क्रियाशील हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यप्रणाली ने नदियों के संरक्षण के प्रयासों को नई गति दी है। हर परियोजना की मॉनीटरिंग की जा रही है, जिससे न केवल गंगा-यमुना की पवित्रता सुनिश्चित हुई है, बल्कि नगरों में जल प्रबंधन की व्यवस्था भी मजबूत हो रही है। 

अपशिष्ट जल से विकास का नया मॉडल-

योगी सरकार अब उपचारित जल के सुरक्षित पुन: उपयोग की नीति तैयार कर रही है। योजना तीन चरणों में लागू होगी। 

1. नगरपालिका- पार्कों की सिंचाई, सड़क सफाई, सार्वजनिक उद्यानों में इस्तेमाल।

 2. उद्योग और कृषि- औद्योगिक प्रक्रियाओं व खेतों की सिंचाई के लिए।

3. घरेलू गैर-पेय उपयोग- निर्माण कार्य समेत अन्य कार्यों में पुनर्चक्रण।  

सीएम योगी कर रहे स्वच्छ नदियों के सपने को साकार-

जहां एसटीपी चालू हैं और क्षमता मौजूद है, वहां वर्ष 2030 तक 50 फीसदी और 2035 तक 100 फीसदी अपशिष्ट जल का पुन: उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह कदम केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और स्वच्छ नदियों के सपने को साकार करने की दिशा में निर्णायक साबित हो रहा है।

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