• About us
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • Terms & Conditions
  • Child Safety Policy
  • Contact
24 Ghante Latest Hindi News
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
No Result
View All Result

मंडल और कमंडल की राजनीति का सिंबल बने कल्याण

Writer D by Writer D
21/08/2021
in Main Slider, उत्तर प्रदेश, राजनीति, लखनऊ
0
Kalyan Singh

Kalyan Singh

14
SHARES
176
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterShare on Whatsapp

वर्ष 1989-90 में जब देश में मंडल और कमंडल की राजनीति ने जोर पकड़ा। आधिकारिक तौर पर पिछड़े वर्ग की जातियों का वर्गीकरण हुआ और पिछड़े वर्ग की राजनीतिक ताकत पर मुहर लगने लगी तब वणिकों और ब्राह्मणों की पार्टी के रूप में मशहूर  हो चली भाजपा ने कल्याण सिंह को पिछड़ा वर्ग का चेहरा बनाया और गुड गवर्नेंस का वादा किया। कल्याण सिंह की  जहां  हिंदू हृदय सम्राट  की छवि बन रही थी, वहीं वे लोधी राजपूतों के मुखिया के तौर पर भी उभर रहे थे। भाजपा में ओबीसी जातियों के फायर ब्रांड नेताओं की आमद होने लगीऔर कल्याण सिंह इनके मुखिया बन गए। वर्ष 1991 में 221 सीटें  जीतने वाली भाजपा की कल्याण के नेतृत्व में सरकार बनी। कारसेवाकों ने 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद गिरा दी और कल्याण सिंह की सरकार बर्खास्त कर  दी गई। 1993 में फिर चुनाव हुए जिसमें भाजपा के वोट तो बढ़े पर सीटें घट गईं। भाजपा सत्ता से बाहर ही रही। दो साल बाद बसपा के साथ गठबंधन कर भाजपा फिर सत्ता में आई पर कल्याण सिंह मुख्यमंत्री नहीं बन पाए।

अटल बिहारी वाजपेयी के दौर में वर्ष 1996 में 425 सीटों की विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी 173 सीटें हासिल कर सबसे बड़ी पार्टी बनी जबकि समाजवादी पार्टी को 108, बहुजन समाज पार्टी को 66 और कांग्रेस को 33 सीटें मिलीं पर तत्कालीन राज्यपाल रोमेश भंडारी ने राष्ट्रपति शासन को छह महीने बढ़ाने के लिए केंद्र को संस्तुति भेज दी। इस पर भी विधिक संघर्ष उत्पन्न हो गया। इसकी वजह यह थी कि राज्य में राष्ट्रपति शासन का पहले ही एक साल पूरा हो चुका था । ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के निर्णय पर रोक लगाते हुए राष्ट्रपति शासन छह महीने बढ़ाने के केंद्र के फ़ैसले को स्वीकृति दे दी।

भाजपा और बसपा ने छह-छह महीने राज्य का शासन चलाने का निर्णय लिया। इससे पहले 1995 में भाजपा और बसपा ने सरकार बनाई थी, पर बाद में भाजपा ने समर्थन वापस ले लिया था जिसकी वजह से राष्ट्रपति शासन लगाया गया था। इस बार नया प्रयोग हुआ। पहले छह महीनों के लिए 21 मार्च 1997 को मायावती उत्तरप्रदेश की मुख्यमंत्री बनाई गईं। 21 सितंबर 1997 को मायावती के छह महीने पूरे होने  भाजपा के कल्याण सिंह मुख्यमंत्री बने। उन्होंने मायावती सरकार के अधिकतर फ़ैसले बदल दिए।

दोनों पार्टियों के बीच मतभेद उत्पन्न हो गए। नाराज मायावती ने  एक महीने के भीतर ही 19 अक्टूबर 1997 को कल्याण सिंह सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया। राज्यपाल रोमेश भंडारी ने दो दिन के भीतर 21 अक्टूबर को कल्याण सिंह को अपना बहुमत साबित करने का फरमान दे दिया। बसपा, कांग्रेस और जनता दल में भारी तोड़-फोड़ हुई और कई विधायक भाजपा में आ गए। कल्याण सिंह को इसका मास्टर माइंड माना गया। विधानसभा अध्यक्ष केसरीनाथ त्रिपाठी के निर्णय से कल्याण को कोई दिक्कत नहीं हुई लेकिन केसरीनाथ त्रिपाठी की खूब राजनीतिक आलोचना हुई।

21 अक्टूबर 1997 को विधानसभा के भीतर विधायकों के बीच माइक फेंका-फेंकी, लात-घूंसे, जूता-चप्पल भी चले। विपक्ष की नामौजूदगी में कल्याण सिंह ने बहुमत साबित कर दिया।  उन्हें 222 विधायकों का समर्थन मिला जो भाजपा की मूल संख्या 173 से 49 अधिक था। राज्यपाल रोमेश भंडारी ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की  संस्तुति कर दी।  22 अक्टूबर को केंद्र ने इस संस्तुति को राष्ट्रपति के. आर. नारायणन को भेज दी। लेकिन राष्ट्रपति नारायणन ने केंद्रीय कैबिनेट की सिफारिश को मानने से इंकार कर दिया और दोबारा विचार के लिए इसे केंद्र सरकार के पास भेज दिया।  केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन की संस्तुति दोबारा राष्ट्रपति के पास नहीं भेजने का फ़ैसला किया।

Tags: kalyan singhkalyan singh passed awayLatest Lucknow News in HindiLucknow Hindi SamacharLucknow News in Hindiup ex cm kalyan singhYogi Adityanathकल्याण सिंहकल्याण सिंह का निधन
Previous Post

1980 में मुस्लिम प्रतिद्वंद्वी से चुनाव हारे थे दिवंगत कल्याण सिंह

Next Post

तमंचा के साथ फेसबुक पर फोटो पोस्ट करने वाले युवकों को पड़ा भारी, गिरफ्तार

Writer D

Writer D

Related Posts

Makhan-Misri Bhog
Main Slider

जन्माष्टमी पर कान्हा को लगाएं माखन-मिश्री का भोग, घी से ऐसे करें झटपट तैयार

04/09/2026
Janmashtami
Main Slider

जन्माष्टमी: भगवान श्रीकृष्ण को लगाएं राशिनुसार भोग

04/09/2026
Janmashtami
Main Slider

जन्माष्टमी पर ऐसे करें बाल-गोपाल की पूजा, पूरी होगी संतान प्राप्ति की मनोकामना

04/09/2026
CM Yogi
उत्तर प्रदेश

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य और पशुधन सुरक्षा की तैयारी तेज

03/09/2026
CM Yogi
उत्तर प्रदेश

योगी सरकार में आधुनिक हो रहे राजकीय नलकूप, किसानों के खेतों तक पहुंच रहा पानी

03/09/2026
Next Post
arrested

तमंचा के साथ फेसबुक पर फोटो पोस्ट करने वाले युवकों को पड़ा भारी, गिरफ्तार

यह भी पढ़ें

CM Dhami

प्रधानमंत्री की अपेक्षाओं के अनुरूप हमारा राज्य, तेजी से विकास के पथ पर अग्रसर: मुख्यमंत्री

14/08/2025
massive fire

पुलिस के मालखाने में लगी भीषण आग, 350 गाड़ियां जलकर खाक

13/02/2022
cm pushkar

मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने पौढ़ी गढ़वाल का किया दौरा

03/09/2021
Facebook Twitter Youtube

© 2017 24घंटेऑनलाइन

  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म

© 2017 24घंटेऑनलाइन

Go to mobile version