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कब है कालाष्टमी, जानें पूजा विधि एवं महत्व

Writer D by Writer D
09/01/2026
in धर्म, फैशन/शैली
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Kalashtami

Kalashtami

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हिंदू धर्म में कालाष्टमी ( Kalashtami) का विशेष महत्व है। यह दिन भगवान शिव के रौद्र रूप भगवान कालभैरव को समर्पित है। हर माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी मनाई जाती है। साल 2026 की पहली कालाष्टमी माघ मास में पड़ रही है, जिसे लेकर लोगों में तारीख को लेकर थोड़ा कंफ्यूजन है। अगर आप भी उलझन में हैं कि व्रत 9 जनवरी को रखना है या 10 जनवरी को, तो इस लेख में अपना हर कंफ्यूजन दूर करें।

9 या 10 जनवरी: कब है कालाष्टमी ( Kalashtami)?

अष्टमी तिथि प्रारंभ: 10 जनवरी, शनिवार को सुबह 08:24 बजे से।
अष्टमी तिथि समाप्त: 11 जनवरी, रविवार को सुबह 11:21 बजे तक।
चूंकि कालाष्टमी की पूजा विशेष रूप से रात के समय यानी निशिता काल में की जाती है और उदया तिथि भी 10 जनवरी को मिल रही है, इसलिए कालाष्टमी का व्रत 10 जनवरी 2026, शनिवार को ही रखा जाएगा।

कालाष्टमी ( Kalashtami) की पूजा विधि

कालाष्टमी ( Kalashtami) के दिन कालभैरव की पूजा पूरे विधि-विधान से करनी चाहिए। सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें। पूजा स्थल पर भगवान शिव, माता पार्वती और कालभैरव की प्रतिमा स्थापित करें। भगवान के समक्ष सरसों के तेल का दीपक जलाएं। कालभैरव को इमरती, जलेबी या उड़द की दाल के बड़े अर्पित करें। ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं’ मंत्र का जाप करें। कालभैरव का वाहन कुत्ता है। इसलिए इस दिन काले कुत्ते को मीठी रोटी या बिस्कुट खिलाना बेहद शुभ माना जाता है।

कालाष्टमी ( Kalashtami) का महत्व

भगवान कालभैरव को ‘काशी का कोतवाल’ कहा जाता है। मान्यताओं के अनुसार,कालभैरव की पूजा करने से साधक को अकाल मृत्यु और किसी भी प्रकार के अनिष्ट का भय नहीं रहता है। घर से नकारात्मक शक्तियों और बुरी नजर के दोष दूर होते हैं। शनि और राहु-केतु के अशुभ प्रभावों को कम करने के लिए भी कालाष्टमी ( Kalashtami) का व्रत अत्यंत फलदायी माना जाता है।

Tags: kalashtami
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