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उच्च शिक्षण संस्थानों में जब पढ़ाई ही नहीं हुई तो परीक्षा किस बात की?

Desk by Desk
14/08/2020
in Main Slider, नई दिल्ली, राष्ट्रीय, शिक्षा, स्वास्थ्य
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petrol prices increased

पेट्रोल कीमत घटाने के आदेश को किया खारिज

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने देश भर के कॉलेजों एवं यूनिवर्सिटी में स्नातक पाठ्यक्रमों में अंतिम वर्ष की परीक्षाएं रद्द करने संबंधी याचिकाओं की सुनवाई 18 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दी है। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से कहा कि जब पढ़ाई ही नहीं हुई तो परीक्षा किस बात की?

याचिकाकर्ता यश दुबे की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति एम आर शाह की खंडपीठ के समक्ष अंतिम वर्ष की परीक्षा कराने के विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के निर्णय पर सवाल खड़े किये। श्री सिंघवी ने कहा कि जब पाठ्यक्रम की पढ़ाई ही नहीं हुई, तो परीक्षा किस बात की ली जायेगी। कोई विश्वविद्यालय बिना पढ़ाये परीक्षा देने पर बाध्य नहीं कर सकता।

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उन्होंने आश्चर्य व्यक्त किया कि जब देश में 1137 कोरोना के मामले थे। तब यूजीसी ने परीक्षाएं आयोजित नहीं की तो वह 22 लाख से अधिक मामले होने पर भी परीक्षाएं कैसे आयोजित करा सकती है? उन्होंने यह भी कहा कि जब गृह मंत्रालय ने अपने अनलॉक कार्यक्रम में स्कूल कॉलेजों को खोलने की अनुमति नहीं दी है। तो उसने परीक्षा आयोजित कराने के लिए यूजीसी को निर्देश कैसे दे दिया?

श्री सिंघवी ने कहा कि गृह मंत्रालय ने इन पहलुओं पर बिना सोचे समझे ही परीक्षा आयोजित करने के लिए यूजीसी को आदेश जारी कर दिये और आयोग ने भी 30 सितम्बर तक अंतिम वर्ष की परीक्षाएं आयोजित करने को लेकर अधिसूचना जारी कर दी।

कुछ छात्रों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने भी कहा कि 29 अप्रैल को देश में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 1137 थी, तब यूजीसी ने परीक्षाएं आयोजन कराने का निर्णय नहीं लिया। ऐसे में आज जब देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या 22 लाख से अधिक है तो यूजीसी परीक्षाएं कैसे आयोजित करा सकता है?

Tags: Supreme Courtजब पढ़ाई ही नहीं हुई तो परीक्षा किस बात की?सुप्रीम कोर्ट
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