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कब मनाई जाएगी शनि त्रयोदशी, जानें पूजा विधि एवं महत्व

Writer D by Writer D
08/02/2026
in Main Slider, धर्म, फैशन/शैली
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Shani Trayodashi

Shani Dev

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शनि त्रयोदशी (Shani Trayodashi) बहुत विशेष और पावन मानी जाती है। इसे शनि प्रदोष व्रत के नाम से भी जाना जाता है। जब त्रयोदशी तिथि शनिवार के दिन पड़ती है, तो उसे शनि त्रयोदशी कहा जाता है। साल 2026 में फाल्गुन महीने में त्रयोदशी तिथि और शनिवार के दिन का संयोग बन रहा है। ये दिन भगवान शिव और शनि देव दोनों की कृपा एक साथ प्राप्त करने का शुभ अवसर माना जाता है।

जिन जातकों पर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही है, उनके लिए यह दिन वरदान माना जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि साल 2026 में शनि त्रयोदशी किस दिन मनाई जाएगी? साथ ही जानते हैं इसकी पूजा विधि, महत्व और उपाय।

कब है शनि त्रयोदशी (Shani Trayodashi)?

इस बार 14 फरवरी, 2026 के दिन शनि त्रयोदशी मनाई जाएगी। साथ ही इसी दिन शनि प्रदोष का व्रत रखा जाएगा।

शनि त्रयोदशी (Shani Trayodashi) पूजा विधि

शनि त्रयोदशी (Shani Trayodashi) के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें। पीपल के पेड़ के पास जाकर जल चढ़ाएं। शाम को सूर्यास्त के समय फिर स्नान कर साफ वस्त्र पहनें। भगवान शिव का गंगाजल और दूध से अभिषेक करें। उन्हें बिल्व पत्र और शमी के पत्ते अर्पित करें। पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और उसमें काले तिल डालें। ॐ नमः शिवाय और ॐ शं शनैश्चराय नमः मंत्रों का 108 बार जप करें। शनि त्रयोदशी कथा पढ़ें। अंत में शनि चालीसा और आरती करें।

शनि त्रयोदशी (Shani Trayodashi) का महत्व

शनि देव भगवान शिव के परम भक्त माने जाते हैं। देवों के देव महादेव ने ही शनि देव को न्याय के देवता का पद दिया था। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शनि त्रयोदशी के दिन व्रत रखने और पूजा करने से शनि दोष के प्रभावों से मुक्ति मिलती है। शनि त्रयोदशी के दिन व्रत और पूजा से उन लोगों को विशेष लाभ मिलता है, जिनके काम में लंबे समय से रुकावट आ रही है और जो लंबी बीमारी से जूझ रहे हैं।

शनि त्रयोदशी (Shani Trayodashi) के उपाय

शनि त्रयोदशी (Shani Trayodashi) तिथि पर शिवलिंग पर तिल के तेल से अभिषेक करें। शनि देव की उपासना करें। काले तिल और सरसों का तेल शनि देव को अर्पित करें। इन उपायों से शनि दोष से मुक्ति मिलती है। इसदिन शाम के समय पीपल के पेड़ की पूजा करें। गंगाजल में काले तिल मिलाकर पीपल के पेड़ की जड़ में अर्पित करें।

Tags: Shani Trayodashi
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