सावन के महीने में अयोध्या में आयोजित मछली भोज को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए सावन में मछली की दावत को लेकर सवाल खड़े किए हैं। वहीं, उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने कार्यक्रम में शामिल होने की वजह बताते हुए इसे निषाद समाज की पारंपरिक आजीविका और सामाजिक कार्यक्रम से जोड़ा है।
ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि सावन के महीने में मछली की दावत आयोजित करना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि मछली में प्याज और लहसुन का इस्तेमाल किया गया है तो वह नॉन-वेज मानी जाएगी। हालांकि, बिना प्याज-लहसुन के तैयार की गई मछली को लेकर उन्होंने अलग राय जताई। राजभर ने कांग्रेस से यह स्पष्ट करने को कहा कि कार्यक्रम में मछली किस तरह तैयार की गई थी।
इस बयान के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने मामले पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि अयोध्या दौरे के दौरान उन्होंने सबसे पहले भगवान राम से जुड़े धार्मिक स्थलों पर दर्शन-पूजन किया। उन्होंने हनुमानगढ़ी और राम मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद निषाद समाज की ओर से आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
अजय राय ने कहा कि मछली पकड़ना, बेचना और खाना निषाद समाज की पारंपरिक आजीविका का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि निषाद समाज का जीवन नदियों से जुड़ा रहा है और पुराने समय में इस समुदाय के लोगों को नदियों और तालाबों से जुड़ी जमीन पट्टे पर दी जाती थी।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने मौजूदा सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि अब व्यवस्था बदल गई है और बड़ी कंपनियों को भी नदियों तथा बालू से जुड़े पट्टे दिए जा रहे हैं। अजय राय के मुताबिक, निषाद समाज के लोगों ने अपने स्तर पर मछली तैयार की थी और समाज के लोगों के प्रेम व सम्मान के चलते उन्होंने कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
इस पूरे मामले को लेकर अयोध्या में धार्मिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। मछली भोज को लेकर जहां भाजपा नेताओं ने सवाल उठाए हैं, वहीं कांग्रेस इसे निषाद समाज से जुड़े सामाजिक कार्यक्रम के तौर पर देख रही है।









