• About us
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • Terms & Conditions
  • Child Safety Policy
  • Contact
24 Ghante Latest Hindi News
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
No Result
View All Result

चीन का सबसे बड़ा धोखा: 1962 में किया था ये काम, एक महीने बाद युद्धविराम

Desk by Desk
21/11/2020
in Main Slider, अंतर्राष्ट्रीय, ख़ास खबर, राष्ट्रीय
0
indo-china war

indo-china war

14
SHARES
176
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterShare on Whatsapp

नई दिल्ली: पूर्वी लद्दाख में इन दिनों भारत और चीन के बीच जबर्दस्त तनाव बना हुआ है और भारत के कड़े रुख के कारण चीन अपनी साजिशों में कामयाब नहीं हो पा रहा है। दरअसल चीन दुनिया का एक ऐसा देश है जिस पर कभी भरोसा नहीं किया जा सकता। 58 साल पहले 1962 में भी चीन ने भारत के साथ बड़ा धोखा करते हुए हमला कर दिया था। इस युद्ध को 1962 के भारत-चीन युद्ध के नाम से जाना जाता है। भारत को कभी चीन की ओर से हमले की आशंका ही नहीं थी। दोनों देशों के बीच करीब एक महीने तक यह लड़ाई चली थी और आखिरकार 21 नवंबर को चीन ने भारत के साथ युद्धविराम की घोषणा की थी।

दोस्ताना संबंध की भारत की नीति

भारत ने अंग्रेजों के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ने के बाद 1947 में आजादी हासिल की थी और 1949 में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना बना। आजादी के बाद भारत सरकार की नीति चीन से दोस्ताना संबंध बनाने की थी। दूसरी ओर चीन की नीयत साफ नहीं थी। चीन ने जब तिब्बत पर कब्जा करने की घोषणा की तो भारत की ओर से विरोध पत्र भेजा गया था और इस मामले पर चर्चा की मांग की गई थी।

जहरीली शराब माफियाओं पर कार्रवाई करने में योगी सरकार फेल : प्रियंका गांधी

बुरे दौर में भी दिया चीन का साथ

हालांकि भारत चीन से रिश्ते को लेकर काफी गंभीर था। भारत की चीन के प्रति दोस्ताना नीति को इसी बात से समझा जा सकता है कि जापान के साथ एक शांति समझौते के लिए हुए सम्मेलन में भारत ने केवल इसलिए शिरकत नहीं की क्योंकि उसमें चीन को नहीं बुलाया गया था। उस समय चीन अपनी नीतियों को लेकर पूरी दुनिया में अलग-थलग पड़ गया था। वैसे बुरे दौर में भी भारत ने चीन का साथ दिया था।

दोनों देशों में पंचशील समझौता

दोनों देशों के बीच 1954 में शांतिपूर्ण सह अस्तित्व के लिए पांच सिद्धांतों को लेकर समझौता भी हुआ था। इसे पंचशील समझौते के नाम से जाना गया। भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री ने उसी समय हिंदी-चीनी, भाई-भाई का मशहूर नारा भी दिया था।

ऐसे हुई तनाव की शुरुआत

1959 में दोनों देशों के बीच संबंधों में तनाव की शुरुआत हुई। दलाई लामा के मार्च 1959 में शरण लेने के लिए भारत आने पर यहां उनका जोरदार स्वागत किया गया। यह चीन को काफी नागवार गुजरा और माओ ने भारत पर ल्हासा विद्रोह को भड़काने का बड़ा आरोप लगा दिया। यहीं से दोनों देशों के रिश्ते बिगड़ने लगे। चीन को लगने लगा कि तिब्बत पर अपना कब्जा कायम रखने में भारत उसके लिए सबसे बड़ी रूकावट बन रहा है।

1959 से 1962 के बीच भारत और चीन के बीच छिटपुट संघर्ष भी हुए। चीनी सैनिकों ने 1962 में चुशुल स्थित एक भारतीय चौकी को घेर लिया। चीनी सैनिकों ने लाउडस्पीकरों के जरिए गोरखा सैनिकों को यह समझाने की कोशिश की कि वे भारत की ओर से न लड़ें।

ये हैं देश के 5 सबसे ज्यादा बिकने वाले स्कूटर्स, बाइक्स को देते हैं कड़ी टक्कर

तनाव के बाद चीन ने किया हमला

1962 की जुलाई महीने में हुई इस घटना के बाद उसी साल 20 अक्टूबर को दोनों देशों के बीच युद्ध की शुरुआत हो गई। चीनी सेना ने लद्दाख और मैकमोहन लाइन पर हमला कर दिया।

भारत इस हमले का सामना करने के लिए तैयार नहीं था क्योंकि युद्ध की शुरुआत होने तक भारत को इस बात का पूरा भरोसा था कि दोनों देशों में युद्ध नहीं होगा। यही कारण था कि भारत की ओर से इस बाबत कोई भी तैयारी नहीं की गई थी।

भारत की ओर से युद्ध क्षेत्र में सिर्फ दो टुकड़ियां थीं जबकि चीन ने अपनी तीन रेजिमेंट्स तैयार तैनात कर रखी थीं। भारत की टेलीफोन लाइनों को भी चीनी सैनिकों ने काट दिया था और इस कारण भारतीय सैनिकों का अपने मुख्यालय से संपर्क करना भी कठिन हो गया था।

भारतीय सेना ने किया मुकाबला

भारतीय सेना की ओर से चीनी सैनिकों का जांबाजी से मुकाबला किया गया। भारत की ओर से मशीनगन से की गई फायरिंग में एक दर्रे में जमा 200 चीनी सैनिक मारे गए।

दूसरी और चीनी सेना ने भारतीय सेना की तैयारी न होने का फायदा उठाते हुए भारतीय इलाकों पर कब्जा करना शुरू कर दिया। हमले के चार दिन बाद ही चीनी सैनिक भारतीय क्षेत्र में करीब 15 किलोमीटर तक घुस आए।

नेहरू ने खारिज किया प्रस्ताव

इस बीच चीन के प्रधानमंत्री की ओर से तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू को चिट्ठी लिखकर संघर्षविराम की इच्छा जताई गई। उनका सुझाव था कि दोनों देशों की सेना वास्तविक नियंत्रण रेखा के 20 किलोमीटर अंदर वापस बुला ली जाएं।

चीनी प्रधानमंत्री जो इनलाई ने अपने प्रस्ताव में कहा था कि चीन अरुणाचल प्रदेश से वापस निकल जाएगा और अकसाई चीन पर दोनों देश पूर्व स्थिति बनाए रखें। नेहरू ने 27 अक्टूबर को चीन के प्रस्ताव को खारिज करते हुए अकसाई चीन पर चीन के दावे को अवैध बताया।

हिना खान ने पहने ऐसे कपड़े कि समझ नहीं आया तारीफ करें या बुराई

आज के ही दिन युद्धविराम की घोषणा

संसद में भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई और देश की जमीन से आक्रमणकारियों को खदेड़ने के लिए प्रस्ताव पारित किया गया। 14 नवंबर को दोनों देशों के बीच एक बार फिर युद्ध की शुरुआत हो गई और फिर एक हफ्ते तक चले युद्ध के बाद 21 नवंबर 1962 को चीन की ओर से एकतरफा युद्धविराम की घोषणा कर दी गई।

चीन पूर्वोत्तर के इलाके से तो निकल गया मगर उसने अकसाई चीन पर कब्जा कर लिया। जानकारों का कहना है कि चीन शुरुआत से ही ऐसा देश रहा है जिस पर कभी भरोसा नहीं किया जा सकता और उस पर भरोसा करने वाला हमेशा धोखे का शिकार होता है।

Tags: 24 ghante online24ghante24ghante online24ghante online.com24ghanteonline24ghanteonline.comChinahindi newsIndiaindia china disputeIndia News in Hindiindo chinaindo-china disputeIndo-China warlatest newsNational newsNEWSnews in hindiwar with chinaताजा समाचारभारतहिंदी समाचार
Previous Post

सूर्योपासना का छठ महापर्व समाप्त, अलग-अलग हादसों में 11 की लोगों मौत

Next Post

ममता सरकार कर रही है लोकतांत्रिक मूल्यों का हनन : राज्यपाल

Desk

Desk

Related Posts

Upper Lip Hair
Main Slider

इन घरेलू नुस्खों से पाएं चेहरे के अनचाहे बालो से छुटकारा

01/07/2026
Wedding Lehenga
Main Slider

पुराने लहंगे को करें रीयूज, हर कोई करेगा आपके लुक की तारीफ

01/07/2026
Cumin
Main Slider

कहीं आपकी रसोई में रखा जीरा नकली तो नहीं, खरीदने से पहले ऐसे करें चेक

01/07/2026
White Hair
Main Slider

सफ़ेद बालों से छुटकारा पाने के लिए अपनी डाइट में शामिल करें ये चीजें

01/07/2026
CM Vishnudev Sai
छत्तीसगढ़

CM विष्णुदेव साय बोले- ‘एक पेड़ माँ के नाम’ मातृशक्ति और प्रकृति के प्रति श्रद्धा का प्रतीक

30/06/2026
Next Post
जगदीप धनखड़ Jagdeep Dhankar

ममता सरकार कर रही है लोकतांत्रिक मूल्यों का हनन : राज्यपाल

यह भी पढ़ें

aakash chopra

आकाश चोपड़ा : कैसे मिलेगी दूसरे वनडे में टीम इंडिया को जीत

29/11/2020
arrested

पाकिस्तानी हैंडलरों को हवाला के जरिए रुपये पहुंचाने वाले को ATS ने किया गिरफ्तार

04/08/2021
Supreme Court

स्किन टू स्किन केस पर SC ने कहा- तब तो दस्ताना पहनकर कोई छूए तो उसे सजा ही न हो

24/08/2021
Facebook Twitter Youtube

© 2022 24घंटेऑनलाइन

  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म

© 2022 24घंटेऑनलाइन

Go to mobile version