• About us
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • Terms & Conditions
  • Child Safety Policy
  • Contact
24 Ghante Latest Hindi News
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
No Result
View All Result

वीरांगना झलकारी बाई का त्यागमय जीवन सभी राष्ट्र आराधकों के लिए प्रेरणास्पद: सीएम योगी

Writer D by Writer D
22/11/2022
in उत्तर प्रदेश, लखनऊ
0
CM Yogi

CM Yogi

14
SHARES
176
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterShare on Whatsapp

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi) ने ब्रिटिश हुकूमत का प्रखर प्रतिकार करने वाली अमर वीरांगना झलकारी बाई की जयंती पर श्रद्धांजलि दी।

मुख्यमंत्री (CM Yogi) ने ट्वीट कर कहाकि वीरता, पराक्रम व साहस की अद्भुत प्रतीक, ब्रिटिश हुकूमत का प्रखर प्रतिकार करने वाली अमर वीरांगना झलकारी बाई की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि है। मातृभूमि की रक्षा को समर्पित आपका त्यागमय जीवन सभी राष्ट्र आराधकों के लिए प्रेरणास्पद है।

मुख्यमंत्री योगी (CM Yogi) ने पूर्व रक्षा मंत्री, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव (Mulyam Singh Yadav) की जयंती पर भी उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि दी।

झलकारी बाई का प्रारंभिक जीवन

ज्ञात हो कि झलकारी बाई का जन्म 22 नवम्बर 1830 को झांसी के पास भोजला गांव में एक निर्धन कोली परिवार में हुआ था। झलकारी बाई के पिता का नाम सदोवर सिंह और माता का नाम जमुना देवी था। जब झलकारी बाई बहुत छोटी थीं तब उनकी माँ की मृत्यु के हो गयी थी, और उसके पिता ने उन्हें एक लड़के की तरह पाला था। उन्हें घुड़सवारी और हथियारों का प्रयोग करने में प्रशिक्षित किया गया था। उन दिनों की सामाजिक परिस्थितियों के कारण उन्हें कोई औपचारिक शिक्षा तो प्राप्त नहीं हो पाई, लेकिन उन्होनें खुद को एक अच्छे योद्धा के रूप में विकसित किया था।

झलकारी बचपन से ही बहुत साहसी और दृढ़ प्रतिज्ञ बालिका थी। झलकारी घर के काम के अलावा पशुओं का रख-रखाव और जंगल से लकड़ी इकट्ठा करने का काम भी करती थीं। एक बार जंगल में उसकी मुठभेड़ एक तेंदुए से हो गयी थी और झलकारी ने अपनी कुल्हाड़ी से उस तेंदुआ को मार डाला था। एक अन्य अवसर पर जब डकैतों के एक गिरोह ने गाँव के एक व्यवसायी पर हमला किया तब झलकारी ने अपनी बहादुरी से उन्हें पीछे हटने को मजबूर कर दिया था। उसकी इस बहादुरी से खुश होकर गाँव वालों ने उसका विवाह रानी लक्ष्मीबाई की सेना के एक सैनिक पूरन कोरी से करवा दिया, पूरन भी बहुत बहादुर था और पूरी सेना उसकी बहादुरी का लोहा मानती थी। एक बार गौरी पूजा के अवसर पर झलकारी गाँव की अन्य महिलाओं के साथ महारानी को सम्मान देने झाँसी के किले में गयीं, वहाँ रानी लक्ष्मीबाई उन्हें देख कर अवाक रह गयी क्योंकि झलकारी बिल्कुल रानी लक्ष्मीबाई की तरह दिखतीं थीं।

झलकारी बाई का स्वाधीनता संग्राम में भूमिका

झलकारी बाई का पति पूरन किले की रक्षा करते हुए शहीद हो गये थे, लेकिन झलकारी बाई ने बजाय अपने पति की मृत्यु का शोक मनाने के, ब्रिटिशों को धोखा देने की एक योजना बनाई। उन्होने लक्ष्मीबाई की तरह कपड़े पहने और झांसी की सेना की कमान अपने हाथ में ले ली। जिसके बाद वह किले के बाहर निकल ब्रिटिश जनरल ह्यूग रोज़ के शिविर में उससे मिलने पहुंची। ब्रिटिश शिविर में पहुंचने पर उन्होने चिल्लाकर कहा कि वो जनरल ह्यूग रोज़ से मिलना चाहती है। रोज़ और उसके सैनिक प्रसन्न थे कि न सिर्फ उन्होने झांसी पर कब्जा कर लिया है बल्कि जीवित रानी भी उनके कब्ज़े में है। जनरल ह्यूग रोज़ जो उसे रानी ही समझ रहा था, ने झलकारी बाई से पूछा कि उसके साथ क्या किया जाना चाहिए? तो उसने दृढ़ता के साथ कहा, मुझे फाँसी दो। जनरल ह्यूग रोज़ झलकारी का साहस और उसकी नेतृत्व क्षमता से बहुत प्रभावित हुआ और झलकारी बाई को रिहा कर दिया गया।

इसके विपरीत कुछ इतिहासकार मानते हैं कि झलकारी इस युद्ध के दौरान वीरगति को प्राप्त हुई। एक बुंदेलखंड किंवदंती है कि झलकारी के इस उत्तर से जनरल ह्यूग रोज़ दंग रह गया और उसने कहा कि यदि भारत की एक प्रतिशत महिलायें भी उसके जैसी हो जायें तो ब्रिटिशों को जल्दी ही भारत छोड़ना होगा।

भीषण सड़क हादसे में पांच लोगों की मौत, सीएम योगी ने जताया शोक

झलकारी बाई (22 नवंबर 1830-4 अप्रैल 1857) झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई की नियमित सेना में, महिला शाखा दुर्गा दल की सेनापति थीं। वे लक्ष्मीबाई की हमशक्ल भी थीं इस कारण शत्रु को गुमराह करने के लिए वे रानी के वेश में भी युद्ध करती थीं। अपने अंतिम समय में भी वे रानी के वेश में युद्ध करते हुए वे अंग्रेज़ों के हाथों पकड़ी गयीं और रानी को किले से भाग निकलने का अवसर मिल गया। उन्होंने प्रथम स्वाधीनता संग्राम में झाँसी की रानी के साथ ब्रिटिश सेना के विरुद्ध अद्भुत वीरता से लड़ते हुए ब्रिटिश सेना के कई हमलों को विफल किया था। यदि लक्ष्मीबाई के सेनानायकों में से एक ने उनके साथ विश्वासघात न किया होता तो झांसी का किला ब्रिटिश सेना के लिए प्राय: अभेद्य था। झलकारी बाई की गाथा आज भी बुंदेलखंड की लोकगाथाओं और लोकगीतों में सुनी जा सकती है।

Tags: cm yogiLucknow Newsup news
Previous Post

पीएम मोदी को मिली जान से मारने की धमकी, मुंबई पुलिस को वॉट्सएप पर आया ऑडियो मैसेज

Next Post

आयुषी यादव हत्याकांड: मां बाप निकले हत्यारोपी, गिरफ्तार

Writer D

Writer D

Related Posts

Main Slider

मुख्यमंत्री योगी ने सुधा सिंह को दी श्रद्धांजलि, परिजनों को बंधाया ढांढस

16/09/2026
Transfer
Main Slider

उप्र में पांच पीसीएस अधिकारियाें का तबादला

16/09/2026
Main Slider

लखनऊ से शुरू ‘भारत टैक्सी’ को सभी 75 जिलों तक ले जाएगी योगी सरकार

16/09/2026
sugar mills
उत्तर प्रदेश

गन्ना किसानों को 102 चीनी मिलों ने किया शत-प्रतिशत भुगतान

16/09/2026
UP enters the global semiconductor platform
उत्तर प्रदेश

सेमीकंडक्टर के ग्लोबल मंच पर यूपी की दस्तक, 17 से 19 सितंबर तक सेमीकॉन इंडिया 2026 का दिल्ली में आयोजन

16/09/2026
Next Post
Ayushi Yadav Murder Case

आयुषी यादव हत्याकांड: मां बाप निकले हत्यारोपी, गिरफ्तार

यह भी पढ़ें

Sticks in two sides in the dispute

मामूली विवाद में दो पक्षों में चले लाठी-डंडे, पीड़ित परिवार ने लगाई न्याय की गुहार

21/03/2021
अखिलेश यादव

“न दलील, न अपील, न वकील” बस आपातकाल जैसी व्यवस्था है : अखिलेश

19/08/2020
thieves arrested

एसटीएफ ने नौ गौ-तस्करों को किया गिरफ्तार, 150 पशु बरामद

23/12/2020
Facebook Twitter Youtube

© 2017 24घंटेऑनलाइन

  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म

© 2017 24घंटेऑनलाइन

Go to mobile version