• About us
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • Terms & Conditions
  • Child Safety Policy
  • Contact
24 Ghante Latest Hindi News
Advertisement
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
No Result
View All Result

नहीं रहे हरित क्रांति के जनक एम. एस. स्वामीनाथन, 98 साल की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा

Writer D by Writer D
28/09/2023
in Main Slider, राष्ट्रीय, शिक्षा
0
M.S. Swaminathan

M.S. Swaminathan

14
SHARES
176
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterShare on Whatsapp

भारत को हरित क्रांति की सौगात देने वाले महान वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन (M.S. Swaminathan) का 98 साल की उम्र में गुरुवार को निधन हो गया। कृषि वैज्ञानिक एम। एस। स्वामीनाथन को ‘फादर ऑफ ग्रीन रेवोल्यूशन इन इंडिया’ यानी ‘हरित क्रांति (Green Revolution) के पिता’ भी कहा जाता है।

7 अगस्त 1925 को तमिलनाडु के कुम्भकोणम में जन्मे एमएस स्वामीनाथन (M.S. Swaminathan) पौधों के जेनेटिक वैज्ञानिक थे। उन्होंने 1966 में मैक्सिको के बीजों को पंजाब की घरेलू किस्मों के साथ मिश्रित करके उच्च उत्पादकता वाले गेहूं के संकर बीज विकसित किए थे।

बता दें कि एमएस स्वामीनाथन (M.S. Swaminathan) को 1967 में ‘पद्म श्री’, 1972 में ‘पद्म भूषण’ और 1989 में ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित किया जा चुका था। स्वामीनाथन सिर्फ भारत ही नहीं दुनियाभर में सराहे जाते थे।

‘हरित क्रांति’ (Green Revolution) कार्यक्रम के तहत ज्यादा उपज देने वाले गेहूं और चावल के बीज गरीब किसानों के खेतों में लगाए गए थे। इस वजह से भारत खाद्यान्न मामले में आत्मनिर्भर बन गया था।

RPSC RAS परीक्षा का एडमिट कार्ड जारी, यहां से करें डाउनलोड

स्वामीनाथन ने 1943 में बंगाल के अकाल और देश में भोजन की कमी के अनुभव के बाद कृषि के क्षेत्र में प्रवेश करने का निर्णय लिया था। उनहोंने जूलॉजी और एग्रीकल्चर दोनों से विज्ञान में स्नातक की डिग्री ली थी।

1960 के दशक में भारत बड़े पैमाने पर अकाल के कगार पर था। तब एमएमएस स्वामीनाथन ने अमेरिकी वैज्ञानिक नॉर्मन बोरलॉग और दूसरे कई वैज्ञानिकों के साथ मिलकर गेहूं की उच्च पैदावारवाली किस्म (HYV) बीज विकसित किए थे।

स्वामीनाथन ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद में 1972 से 1979 तक और अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान में 1982 से 88 तक महानिदेशक के रूप में काम किया।

Tags: father of green revolutionGreen RevolutionM.S. Swaminathan
Previous Post

माफिया अशरफ के साले सद्दाम को एसटीएफ़ ने दबोचा, घोषित था एक लाख का इनाम

Next Post

घास समझकर 100 किलो भांग चट कर गई भेड़ें, फिर हुआ ये…

Writer D

Writer D

Related Posts

उत्तराखंड

13 नवंबर को होगा तीसरा प्रवासी उत्तराखंडी सम्मेलन, युवाओं की भागीदारी पर रहेगा विशेष जोर

30/10/2026
Deepotsav
Main Slider

दीपोत्सव-2026 से पहले अयोध्या में UPSTDC की सौगात, छह घंटे में होंगे प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन

30/10/2026
उत्तराखंड

ऊर्जा क्षेत्र में उत्तराखंड को बड़ी कामयाबी, त्यूणी-प्लासू प्रोजेक्ट को मिली वन स्वीकृति

30/10/2026
उत्तराखंड

उत्तराखंड में 12 साल में 2.25 लाख करोड़ की योजनाएं, CM धामी ने गिनाईं उपलब्धियां

30/10/2026
उत्तराखंड

चमोली हेलीकॉप्टर हादसे पर CM धामी ने जताया गहरा शोक, दुर्घटना की जांच के दिए निर्देश

30/10/2026
Next Post
Sheep

घास समझकर 100 किलो भांग चट कर गई भेड़ें, फिर हुआ ये...

यह भी पढ़ें

General Naravane

ब्रिटेन-इटली की यात्रा के लिए जनरल नरवणे हुए रवाना, वॉर मेमोरियल का करेंगे उद्घाटन

04/07/2021
Bus

मोटरसाइकिल सवार दो होमगार्ड को पिकअप ने मारी टक्कर, एक की मौत

31/03/2023
Dr. Dinesh Sharma

उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा कोरोना पॉज़िटिव, पीजीआई में भर्ती

27/04/2021
Facebook Twitter Youtube

© 2017 24घंटेऑनलाइन

  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म

© 2017 24घंटेऑनलाइन

Go to mobile version