अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वरिष्ठ व्यवस्थापक गोपाल राव (Gopal Rao) ने अचानक मंदिर परिसर छोड़ दिया है। बताया जा रहा है कि बीते 6 जुलाई 2026 को अयोध्या में आयोजित ट्रस्ट की एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान ही वे मंदिर परिसर से हटकर कारसेवक पुरम में शिफ्ट (स्थानांतरित) हो गए थे।
गोपाल राव पर बड़ी कार्रवाई और अधिकार सीमित
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, ट्रस्ट के भीतर यह एक बहुत बड़ा प्रशासनिक कदम माना जा रहा है, क्योंकि गोपाल राव को ट्रस्ट के ‘विशेष आमंत्रित सदस्य’ (Special Invitee) के गरिमामयी पद से पहले ही मुक्त कर दिया गया था। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए अब उनका आधिकारिक ‘कार पास’ भी वापस (सरेंडर) करा लिया गया है। कार पास सरेंडर होने के बाद राम मंदिर परिसर के भीतर उनकी तमाम प्रशासनिक और व्यवस्थापकीय गतिविधियां पूरी तरह से समाप्त हो गई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अयोध्या राम मंदिर में पिछले दिनों सामने आए बहुचर्चित ‘चढ़ावा प्रकरण’ (दान-चढ़ावे से जुड़े विवाद) और उसके बाद ट्रस्ट के भीतर शुरू हुए आंतरिक फेरबदल के क्रम में ही यह अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। हालांकि, इस पूरे संवेदनशील घटनाक्रम पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से अभी तक कोई भी आधिकारिक प्रेस नोट या बयान जारी नहीं किया गया है, जिसके चलते गोपाल राव को हटाए जाने के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
वैदेही भवन में बंद कमरे में मैराथन बैठक
इस बड़े घटनाक्रम के बीच, रामनगरी अयोध्या के प्रमुख संतों और धार्मिक नेताओं का एक विशेष प्रतिनिधिमंडल ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी जी महाराज से मुलाकात करने के लिए ‘वैदेही भवन’ पहुंचा हुआ है। इस समय संतों और कोषाध्यक्ष के बीच बंद कमरे में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और गुप्त वार्ता चल रही है। इसी बीच, मंदिर परिसर छोड़ने वाले गोपाल राव भी अचानक वैदेही भवन पहुंचे हैं और वे भी स्वामी गोविंद देव गिरी के साथ चर्चा में शामिल हैं।
राजनीतिक और धार्मिक विश्लेषकों का मानना है कि हालिया विवादों और प्रशासनिक बदलावों के बाद पैदा हुए असंतोष को दूर करने के लिए कोषाध्यक्ष स्वयं आगे आकर रामनगरी के पूज्य संतों को साधने और उन्हें विश्वास में लेने का प्रयास कर रहे हैं।
यतींद्र मोहन मिश्रा बन सकते हैं ट्रस्ट के नए सदस्य
वैदेही भवन में चल रही इस हाई-प्रोफाइल बैठक में एक और खास उपस्थिति ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है। अयोध्या राजपरिवार के मुखिया और राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य राजा विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के पुत्र यतींद्र मोहन मिश्रा भी इस बैठक में विशेष रूप से मौजूद हैं।
सूत्रों का दृढ़ता से दावा है कि राम मंदिर ट्रस्ट में वर्तमान में रिक्त पड़े एक महत्वपूर्ण पद को भरने की तैयारी पूरी कर ली गई है। इस रिक्त स्थान पर नए सदस्य के रूप में युवा और सांस्कृतिक मामलों के जानकार यतींद्र मोहन मिश्रा को ट्रस्ट में शामिल किए जाने की पूरी संभावना है, जिससे ट्रस्ट के प्रशासनिक कार्यों को एक नई ऊर्जा और दिशा मिल सकेगी।









