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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत का कांग्रेस के 2 पदों से इस्तीफा

Writer D by Writer D
12/09/2026
in Main Slider, उत्तराखंड, राष्ट्रीय
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Harish Rawat

Harish Rawat

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देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत (Harish Rawat) ने अपने पूर्व ओएसडी के खिलाफ कथित नकदी और आभूषण बरामदगी से जुड़ी खबरों के बीच उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी के सदस्य और कांग्रेस कार्यसमिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य पद से हटने की घोषणा की है।

हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर जारी पोस्ट में कहा कि टीवी पर देहरादून में उनके पीए के पास भारी मात्रा में नकदी और आभूषण बरामद होने की खबर सामने आ रही है। उन्होंने कहा कि मामले के वास्तविक तथ्यों का खुलासा आने वाले समय में होगा। उन्होंने कहा कि संबंधित व्यक्ति जीना उनके ओएसडी रहे हैं और उन्होंने उनके विभिन्न पदों पर रहते हुए महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं।

उन्होंने कहा कि जीना उनके अनुसार सज्जन, विनम्र और काम करने वाले व्यक्ति रहे हैं। हालांकि, यदि ग्राम सेवकों की भर्ती में ओएमआर शीट के साथ छेड़छाड़ अथवा इस तरह की कोई गलती किए जाने के प्रमाण सामने आते हैं तो वह ऐसे कृत्य के लिए लज्जित होंगे। उन्होंने कहा कि फिलहाल उन्हें इस आरोप पर विश्वास नहीं है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के आगामी चुनाव में काफी कुछ दांव पर है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसके कार्यकर्ता भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं और ऐसे समय में उनके किसी कृत्य से पार्टी के संघर्ष को कोई कमजोरी नहीं आनी चाहिए।

रावत ने कहा कि वह किसी सरकारी पद पर नहीं हैं, इसलिए उससे त्यागपत्र देने का सवाल नहीं है। उन्होंने कहा, ‘मैं उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी का सदस्य हूं और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस कार्यसमिति का स्थायी आमंत्रित सदस्य हूं।’उन्होंने कहा कि पार्टी के संघर्ष में उनकी वजह से कोई कमजोरी न आए, इसलिए वह इन दोनों पदों से हटना चाहते हैं।

अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से जुड़े विवाद का उल्लेख करते हुए हरीश रावत ने कहा कि आयोग का गठन राज्य के युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखकर किया गया था। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में लोक सेवा आयोग को समय पर परीक्षाएं कराने के लिए बाध्य किया गया और विभिन्न क्षेत्रों में भर्ती बोर्डों का गठन किया गया।

उन्होंने दावा किया कि उनके करीब तीन वर्ष के कार्यकाल में 42 हजार से अधिक सरकारी पदों पर भर्तियां हुईं। उन्होंने कहा कि अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति उनके पिछले सेवा रिकॉर्ड के आधार पर की गई थी और शिकायत मिलने के बाद उन्होंने संबंधित व्यक्ति को पद से हटाया अथवा उनसे इस्तीफा मांगा था।

हरीश रावत ने कहा कि किसी व्यक्ति द्वारा भविष्य में किस तरह का आचरण किया जाएगा, इसका अनुमान पहले से नहीं लगाया जा सकता। उन्होंने कहा कि यदि नियुक्तियों अथवा परीक्षाओं की प्रक्रिया के दौरान उनसे कोई “एरर ऑफ जजमेंट” हुआ है तो वह उत्तराखंड के लोगों से इसके लिए क्षमा मांगते हैं।

उन्होंने कहा कि नियुक्तियों और परीक्षाओं में गड़बड़ी राज्य की आने वाली पीढ़ी के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। यदि उनसे जाने-अनजाने में ऐसा कोई कृत्य हुआ है, जिससे राज्य के युवाओं के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है तो वह स्वयं को इसके लिए दंड का पात्र मानते हैं।

रावत ने सार्वजनिक अपील करते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति के पास नियुक्तियों के मामलों में उनकी संलिप्तता या हस्तक्षेप के कोई प्रमाण हैं तो उन्हें सीबीआई, ईडी अथवा राज्य पुलिस को उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि उनसे कोई चूक हुई है तो कानून के अनुसार उन्हें दंडित किया जाना चाहिए।

उन्होंने अपने बयान में पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी का भी उल्लेख किया और कहा कि अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति के संबंध में उन्हें खंडूरी से सलाह मिली थी। रावत ने कहा कि उन्होंने संबंधित व्यक्ति की नियुक्ति उनके पूर्व सेवा रिकॉर्ड के आधार पर की थी। हरीश रावत ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण दायित्व संभालने वाले प्रत्येक व्यक्ति को प्रलोभनों से बचना चाहिए और नियुक्तियों एवं परीक्षाओं की पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।

Tags: Harish RawatUttarakhand News
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