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बंगाल के बाद यूपी में भी नया नियम, SIR में सामान्य निवास प्रमाणपत्र मान्य नहीं

Writer D by Writer D
22/01/2026
in Main Slider, उत्तर प्रदेश, राजनीति, लखनऊ
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Panchayat Elections

voter list

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पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में निवास पत्र को लेकर आपत्ति के बाद अब यूपी में भी चुनाव आयोग की ओर से सामान्य निवास प्रमाणपत्र को स्वीकार नहीं किया जा रहा है। इससे मतदाताओं की मुश्किलें बढ़ गई हैं, हालांकि पश्चिम बंगाल में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट का प्रकाशन हो गया है और अब सुनवाई का दौर चल रहा है, लेकिन इसके विपरीत उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान अब अंतिम दौर मे है। 6 फरवरी को वोटर लिस्ट का ड्राफ्ट का प्रकाशन होगा।

उससे पहले छूटे हुए नामों को वोटर लिस्ट में शामिल करने के लिए एक महीने का समय दिया गया था। लेकिन अभी छूटे हुए कुल मतदाताओं का लगभग 25 फीसदी की आवेदन वोटर लिस्ट शामिल के करने के लिए फॉर्म 6 आ पाया है।

लेकिन अब इसी से जुड़ी एक बड़ी खबर आ रही है। जिन मतदाताओं ने 2003 की मैपिंग से मिलान नहीं किया था और निवास प्रमाण पत्र के तौर पर अपना नाम शामिल करने का दावा किया था। आयोग ने उसे खारिज कर दिया है। आयोग का कहना है कि SIR में सामान्य निवास प्रमाण पत्र मान्य नहीं होंगे।

‘सामान्य निवास प्रमाणपत्र’ को चुनाव आयोग ने किया खारिज

इस प्रक्रिया में जिन मतदाताओं की मैपिंग 2003 की मतदाता सूची से नहीं हो पाई, उन्हें नोटिस भेजे जा रहे हैं। ऐसे मामलों में निवास प्रमाण के लिए प्रस्तुत किए जा रहे ‘सामान्य निवास प्रमाणपत्र’ को चुनाव आयोग स्वीकार नहीं कर रहा है, जिससे पूरे प्रदेश में आम मतदाताओं में असमंजस और परेशानी बढ़ गई है।

प्रदेश के लगभग हर जिले में हजारों मतदाताओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। चुनाव आयोग ने SIR के तहत मैपिंग सत्यापन के लिए 13 मान्य दस्तावेजों की सूची जारी की है, जिसमें छठे नंबर पर सक्षम राज्य प्राधिकारी द्वारा जारी स्थायी निवास प्रमाण पत्र शामिल है, लेकिन उत्तर प्रदेश में अब तहसीलों और जिलों में केवल सामान्य निवास प्रमाणपत्र ही जारी किया जाता है।

मतदाताओं की बढ़ी मुश्किलें

यह प्रमाणपत्र प्रदेश सरकार की छात्रवृत्ति, पेंशन और अन्य सभी योजनाओं में पूरी तरह मान्य है। एक जिलाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया राज्य सरकार ने पुरानी व्यवस्था बदल दी है। अब स्थायी या मूल निवास प्रमाणपत्र अलग से जारी नहीं होते। सभी कार्यों के लिए सामान्य निवास प्रमाणपत्र ही पर्याप्त हैं।

कई लेखपालों ने भी पुष्टि की कि तहसील स्तर पर अब सिर्फ यही प्रमाणपत्र बनाया जाता है। अधिकारियों का कहना है कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि स्थायी निवास प्रमाणपत्र ही मान्य होगा, उनके स्तर पर इसमें बदलाव संभव नहीं है।

चुनाव आयोग ने क्या कहा

उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने कहा कि सामान्य निवास प्रमाणपत्र किसी स्थान पर मात्र 5-6 महीने रहने पर ही जारी हो जाता है। इससे SIR का मूल उद्देश्य पूरा नहीं होता जो लंबे समय से निवास कर रहे वास्तविक मतदाताओं की पहचान करना है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल मतदाताओं की मैपिंग के लिए जारी दस्तावेजों की सूची में स्थायी निवास प्रमाणपत्र है, सामान्य नहीं। इसलिए इसे मान्य नहीं किया जा सकता।

SIR में ये 13 दस्तावेज होंगे मान्य

चुनाव आयोग द्वारा जारी सूची के अनुसार निम्नलिखित दस्तावेज ही मैपिंग सत्यापन के लिए स्वीकार किए जाएंगे।

– केंद्र-राज्य सरकार या सार्वजनिक उपक्रम के कर्मचारी-पेंशनभोगी का पहचान पत्र या पेंशन आदेश।
– 01-07-1987 से पहले जारी कोई भी सरकारी पहचान पत्र-अभिलेख।
– सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी जन्म प्रमाण पत्र।
– पासपोर्ट
– मान्यता प्राप्त शिक्षा बोर्ड का मैट्रिकुलेशन या विश्वविद्यालय का शैक्षणिक प्रमाण पत्र।
– सक्षम राज्य प्राधिकारी द्वारा जारी स्थायी निवास प्रमाण पत्र।
– वन अधिकार प्रमाण पत्र।
– ओबीसी-एससी-एसटी या जाति प्रमाण पत्र।
– राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर।
– परिवार रजिस्टर।
– भूमि-मकान आवंटन प्रमाण पत्र।
– आधार कार्ड आयोग के विशेष निर्देशों के अनुसार

Tags: SIR
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