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जापान की आधुनिक तकनीक और उप्र का ‘स्केल’ बदलेगा खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की तस्वीर: केशव मौर्य

Writer D by Writer D
21/08/2026
in उत्तर प्रदेश, लखनऊ
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Keshav Maurya

Keshav Maurya

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य (Keshav Maurya) ने आज इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, गोमती नगर, लखनऊ में इन्वेस्ट यूपी द्वारा आयोजित जापान-भारत व्यापार नेटवर्किंग कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जापान के राजदूत ओनो केइची को पुष्पगुच्छ एवं भगवान बुद्ध का स्मृति चिन्ह भेंट कर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि भारत और जापान के संबंध केवल व्यापार और आर्थिक साझेदारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके मूल में सदियों पुरानी सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक आत्मीयता है। भगवान तथागत बुद्ध की करुणा, शांति, अहिंसा और मानव कल्याण की शिक्षाओं ने दोनों देशों के लोगों को लंबे समय से एक-दूसरे के करीब लाने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश भगवान बुद्ध की पावन स्मृतियों की धरती है। भगवान बुद्ध ने सारनाथ में अपना प्रथम उपदेश दिया था, जबकि जापान में भी बौद्ध परंपरा का अत्यंत व्यापक प्रभाव है। इस साझा विरासत के कारण भारत और जापान के बीच संबंधों को और मजबूत करने की अपार संभावनाएं हैं।

श्री मौर्य ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास विशाल कृषि संसाधन, पर्याप्त सिंचाई सुविधाएं, विविध प्रकार की फसलें, समृद्ध कृषि उत्पाद और विशाल मानव संसाधन उपलब्ध है, वहीं जापान आधुनिक तकनीक, उच्च गुणवत्ता, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ट्रेसेबिलिटी और वैश्विक बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप उत्पादन में अग्रणी है। जापान की तकनीक और उत्तर प्रदेश का स्केल मिलकर खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की तस्वीर बदल सकते हैं। दोनों की क्षमताओं का समन्वय प्रदेश के किसानों, युवाओं, महिलाओं और उद्यमियों के लिए नए अवसर पैदा कर सकता है। उत्तर प्रदेश सरकार का उद्देश्य किसानों को केवल कच्चा उत्पाद बेचने तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें खाद्य प्रसंस्करण एवं वैल्यू एडिशन की पूरी श्रृंखला से जोड़ना है, ताकि किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य मिले और उनकी आय में वृद्धि हो। उन्होंने जापानी निवेशकों एवं उद्योग जगत से उत्तर प्रदेश के कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में निवेश करने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार हर स्तर पर निवेशकों को आवश्यक सहयोग एवं सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की खाद्य प्रसंस्करण नीति-2023 के अंतर्गत उद्योग स्थापित करने वाले निवेशकों को विभिन्न प्रकार की विशेष सब्सिडी एवं सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने जापानी निवेशकों से इन प्रोत्साहनों का लाभ उठाते हुए प्रदेश में आधुनिक खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग केवल निवेश का माध्यम नहीं है, बल्कि यह रोजगार सृजन, किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम भी है। विशेष रूप से महिला उद्यमिता का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में एक करोड़ से अधिक ग्रामीण महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हुई हैं। इन महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए सरकार लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के नाम से खाद्य प्रसंस्करण इकाई स्थापित करने पर 90 प्रतिशत तक सोलर सब्सिडी का प्रावधान उपलब्ध कराया गया है। उन्होंने जापानी निवेशकों एवं घरेलू उद्यमियों से इस अवसर का लाभ उठाने और महिला केंद्रित खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को बढ़ावा देने का आह्वान किया।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश निवेश के लिए अनुकूल वातावरण वाला राज्य है। प्रदेश में बेहतर कानून-व्यवस्था, पर्याप्त लैंड बैंक, उत्कृष्ट रेल, सड़क एवं एयर कनेक्टिविटी उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि लखनऊ, वाराणसी, कुशीनगर तथा जेवर-नोएडा जैसे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे प्रदेश को देश और दुनिया के प्रमुख बाजारों से जोड़ रहे हैं। इससे निवेशकों के लिए कच्चे माल की उपलब्धता, उत्पादन, लॉजिस्टिक्स, परिवहन और तैयार उत्पादों को घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाना और अधिक आसान हुआ है। उत्तर प्रदेश के विशिष्ट कृषि उत्पादों की चर्चा करते हुए कहा कि प्रदेश में अनेक ऐसे उत्पाद हैं, जिनमें वैश्विक बाजार में अपनी अलग पहचान बनाने की क्षमता है। उन्होंने प्रसिद्ध काला नमक चावल, जिसे बुद्धा राइस के नाम से भी जाना जाता है, का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि काला नमक चावल की अपनी विशिष्ट पहचान, गुणवत्ता और मांग है। लगभग 15,000 मीट्रिक टन वार्षिक उत्पादन वाले इस जीआई-टैग उत्पाद को आधुनिक प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और ट्रेसेबिलिटी के माध्यम से एक प्रीमियम ग्लोबल ब्रांड बनाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में काला नमक चावल सहित अनेक ऐसे कृषि एवं खाद्य उत्पाद उपलब्ध हैं, जिनमें अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान स्थापित करने की क्षमता है। आवश्यकता इस बात की है कि इन उत्पादों को आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक प्रसंस्करण, गुणवत्तापूर्ण पैकेजिंग, ब्रांडिंग और वैश्विक बाजार की मांग के अनुरूप तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की धरती पर पैदा होने वाले उत्पाद विदेशी घरों की रसोई से लेकर उनकी डाइनिंग टेबल तक पहुंच सकते हैं। उत्तर प्रदेश की लगभग 65 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है और लगभग 2 करोड़ 33 लाख परिवार खेती-किसानी के कार्य से जुड़े हुए हैं। इतनी बड़ी कृषि अर्थव्यवस्था को खाद्य प्रसंस्करण से जोड़ना किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा कर सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि किसान के खेत से निकलने वाला उत्पाद केवल मंडी तक सीमित न रहे, बल्कि “फार्म गेट से ग्लोबल प्लेट” तक पहुंचे।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में कृषि उत्पादों की उपलब्धता और जापान की उन्नत तकनीक के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होने पर एक नई आर्थिक साझेदारी का निर्माण हो सकता है। जापानी तकनीक से उत्पादों की गुणवत्ता, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, स्टोरेज, कोल्ड चेन और ट्रेसेबिलिटी को बेहतर किया जा सकता है। इससे उत्तर प्रदेश के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप तैयार कर वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकेगा। प्रदेश सरकार जापानी निवेशकों का स्वागत करती है और उन्हें हर संभव सहयोग प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में निवेश के साथ-साथ तकनीकी सहयोग, कौशल विकास, अनुसंधान, नवाचार और आधुनिक कृषि आधारित उद्योगों के विकास की भी व्यापक संभावनाएं हैं। उन्होंने जापानी प्रतिनिधिमंडल एवं देश-विदेश के निवेशकों से प्रदेश की क्षमता को समझने, यहां उपलब्ध संसाधनों का अध्ययन करने तथा उत्तर प्रदेश में दीर्घकालिक निवेश की संभावनाओं पर कार्य करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि भारत और जापान के बीच भगवान बुद्ध की करुणा, शांति और मानव कल्याण की शिक्षाएं सदियों से आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक मैत्री का सेतु बनी हुई हैं। उत्तर प्रदेश में भगवान बुद्ध की पावन स्मृतियों से लेकर जापान की बौद्ध परंपराओं तक दोनों देशों के बीच साझा सांस्कृतिक विरासत विद्यमान है। यह संबंध भारत-जापान की अटूट सांस्कृतिक आत्मीयता का जीवंत प्रमाण है। अब इसी आत्मीयता को आर्थिक एवं औद्योगिक साझेदारी के नए आयाम से जोड़ने का समय है।

उप मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए कृषि, उद्योग, निवेश और रोजगार के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रही है। उत्तर प्रदेश में कृषि उत्पादन की विशाल क्षमता को आधुनिक तकनीक और निवेश के साथ जोड़कर प्रदेश को देश का सबसे बड़ा खाद्य प्रसंस्करण केंद्र बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जापान के साथ साझेदारी इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

उन्होंने जापानी प्रतिनिधिमंडल तथा देश के घरेलू निवेशकों का उत्तर प्रदेश में स्वागत करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार निवेशकों को आवश्यक सुविधाएं, सुरक्षित वातावरण और बेहतर कारोबारी माहौल उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के व्यापार नेटवर्किंग कार्यक्रम भारत-जापान आर्थिक संबंधों को नई गति देने के साथ ही उत्तर प्रदेश में निवेश, रोजगार और तकनीकी सहयोग के नए अवसर पैदा करेंगे।

कार्यक्रम में भारत में जापान के राजदूत ओनो केइची, हैरी हाकुई कोसातो, निदेशक, किकोमन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, सुदीप गोयनका, निदेशक, गोल्डी ग्रुप सहित जापान एवं भारत के उद्योग जगत के प्रतिनिधि, निवेशक, वरिष्ठ अधिकारी एवं अन्य प्रतिष्ठितजन गरिमामयी रूप से उपस्थित रहे।

Tags: Keshav mauryaLucknow NewsUP-Japan Investment Meet 2026
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