• About us
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • Terms & Conditions
  • Child Safety Policy
  • Contact
24 Ghante Latest Hindi News
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
No Result
View All Result

SC का अहम निर्णय: SC-ST और OBC भी जनरल कैटेगरी में ले सकेंगे लाभ

Writer D by Writer D
17/01/2026
in Main Slider, नई दिल्ली, राजनीति, राष्ट्रीय
0
Supreme Court

Supreme Court

14
SHARES
176
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterShare on Whatsapp

आरक्षण और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बड़ा और स्पष्ट फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा है कि अगर रिजर्व कैटेगरी का कोई उम्मीदवार सामान्य कैटेगरी के कट-ऑफ से अधिक अंक लाता है, तो उसे जनरल कैटेगरी का उम्मीदवार माना जाएगा। यह फैसला न केवल सरकारी भर्तियों में योग्यता की भूमिका को मजबूत करता है, बल्कि आरक्षण की मूल भावना को भी स्पष्ट करता है। इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने भर्ती नियम तय करने के राज्य सरकार के अधिकारों को भी दोहराया है।

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की दो सदस्यीय पीठ, जिसमें जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा शामिल थे उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) या अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का कोई उम्मीदवार बिना किसी तरह की छूट या रियायत लिए सामान्य कैटेगरी के उम्मीदवारों से बेहतर प्रदर्शन करता है, तो उसे सामान्य श्रेणी का ही कैंडिडेट माना जाएगा। ऐसे उम्मीदवार को अनरिजर्व सीटों पर नियुक्त किया जाना चाहिए।

संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 से जुड़ा मामला

अदालत (Supreme Court) ने कहा कि अनरिजर्व कैटेगरी कोई कोटा नहीं है, बल्कि यह एक खुला मंच है, जहां योग्यता के आधार पर सभी वर्गों के उम्मीदवारों को अवसर मिल सकता है। पीठ ने अपने फैसले में कहा कि यह व्यवस्था संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 16 की भावना के अनुरूप है। अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता की गारंटी देता है, जबकि अनुच्छेद 16 सार्वजनिक रोजगार में समान अवसर की बात करता है।

अदालत (Supreme Court) के अनुसार, अगर कोई रिजर्वड कैटेगरी का उम्मीदवार बिना किसी विशेष सुविधा के सामान्य वर्ग से बेहतर प्रदर्शन करता है, तो उसे जनरल कैटेगरी में गिनना ही समानता और न्याय का सही तरीका है। इससे यह भी सुनिश्चित होता है कि आरक्षित वर्ग के लिए तय की गई सीटें वास्तव में जरूरतमंद और योग्य उम्मीदवारों को मिल सकें।

केरल हाईकोर्ट का फैसला किया गया रद्द

इस टिप्पणी के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाईकोर्ट के एक पुराने फैसले को रद्द कर दिया। केरल हाईकोर्ट ने एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) को निर्देश दिया था कि वह एक मेधावी आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार को सामान्य श्रेणी की लिस्ट से हटाकर उसकी जगह एक अनारक्षित वर्ग के उम्मीदवार को नियुक्त करे।

हाईकोर्ट का मानना था कि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को अनारक्षित लिस्ट में शामिल करना गलत है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस सोच को असंवैधानिक करार देते हुए कहा कि योग्यता के आधार पर चयन में वर्ग का बंधन नहीं लगाया जा सकता।

आरक्षण रोस्टर का उद्देश्य क्या है?

अदालत ने आरक्षण रोस्टर को लेकर भी अहम टिप्पणी की। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरक्षण रोस्टर का उपयोग चयन करने के लिए नहीं, बल्कि केवल यह तय करने के लिए किया जाता है कि भर्ती विज्ञापन में कितनी सीटें किस श्रेणी के लिए आरक्षित होंगी।

हालांकि, रोस्टर यह तय करने में मदद करता है कि किसी विशेष श्रेणी का कोटा भर चुका है या नहीं। अगर किसी कैटेगरी के सभी आरक्षित पद योग्य उम्मीदवारों द्वारा भर लिए जाते हैं, तो उस श्रेणी के अतिरिक्त उम्मीदवारों को नियुक्ति का दावा नहीं मिल सकता।

2013 की एएआई भर्ती से जुड़ा विवाद

यह पूरा मामला साल 2013 में एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा निकाली गई भर्ती से जुड़ा है। एएआई ने जूनियर असिस्टेंट (फायर सर्विस) के कुल 245 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी।

चयन के बाद, 122 अनारक्षित पदों पर सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के साथ-साथ OBC, SC और ST वर्ग के ऐसे उम्मीदवारों को चुना गया था, जिन्होंने जनरल कैटेगरी के कट-ऑफ से ज्यादा अंक हासिल किए थे। इसी लिस्ट में शामिल उम्मीदवारों को लेकर विवाद खड़ा हुआ।

वेटिंग लिस्ट के उम्मीदवार की चुनौती

अनारक्षित श्रेणी के उम्मीदवार शाम कृष्णा बी, जिनका नाम वेटिंग लिस्ट में 10वें स्थान पर था उन्होंने इस सिलेक्शन प्रोसेस को चुनौती दी। उनका तर्क था कि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को अनारक्षित सीटों पर शामिल करके सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के अधिकारों का हनन किया गया है।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि योग्यता के आधार पर चयन पूरी तरह संवैधानिक है और इसमें किसी प्रकार का अन्याय नहीं हुआ।

Tags: Supreme Court
Previous Post

ईरान में बड़ा एक्शन: आंदोलन की महिला नेता गिरफ्तार, हिंसा भड़काने की है मास्टरमाइंड

Next Post

स्टार्टअप इंडिया रैंकिंग में उत्तराखण्ड को ‘लीडर’ दर्जा

Writer D

Writer D

Related Posts

Tulsi
Main Slider

घर से दूर हो जाएगी पैसों की तंगी, ले आएं ये पौधे

16/07/2026
Paush Amavasya
Main Slider

इसके बिना अधूरी मानी जाती है पूजा, जानें नियम

16/07/2026
Rudraksha ki mala
Main Slider

रुद्राक्ष धारण करने से मिलती सभी कष्टों से मुक्ति, जानें माला पहनने के नियम

16/07/2026
Hair color
Main Slider

पहली बार हेयर कलर करते समय इन बातों का रखें ख्याल

16/07/2026
Makeup
Main Slider

बारिश में नहीं खराब होगा मेकअप, इन बातों का रखें ध्यान

16/07/2026
Next Post
Uttarakhand gets 'Leader' status in Startup India Ranking

स्टार्टअप इंडिया रैंकिंग में उत्तराखण्ड को ‘लीडर’ दर्जा

यह भी पढ़ें

नॉनस्टाप बसें

उत्तराखंड के लिए आज से चलेंगी रोडवेज की बसें, लखनऊ से तीन गाड़ियों का संचालन

01/10/2020
prostitution

दबंगों ने युवती को घर से उठा दो माह तक किया शारीरिक शोषण

17/01/2022
मदरसों से निकला भ्रष्टाचार का जिन्न Jinn of corruption out of madrasas

बलरामपुर : मदरसों से निकला भ्रष्टाचार का जिन्न, प्रिंसिपल सहित 6 पर एफआईआर

27/01/2021
Facebook Twitter Youtube

© 2017 24घंटेऑनलाइन

  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म

© 2017 24घंटेऑनलाइन

Go to mobile version