भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court ) के पांच नए न्यायाधीशों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इन नियुक्तियों के साथ सर्वोच्च न्यायालय में जजों की संख्या बढ़कर 37 हो गई है। अब स्वीकृत 38 पदों में से केवल एक पद ही रिक्त बचा है।
शपथ लेने वाले नए न्यायाधीशों में वरिष्ठ अधिवक्ता वी.एस. मोहना, बॉम्बे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर, पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति शील नागू, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा और जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण पल्ली शामिल हैं।
इन नामों की सिफारिश सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court ) कॉलेजियम ने 27 मई को की थी। केंद्र सरकार ने भी तेजी दिखाते हुए महज चार दिनों के भीतर इन नियुक्तियों को मंजूरी दे दी।
हाल ही में केंद्र सरकार ने एक अध्यादेश के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court ) में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 34 से बढ़ाकर 38 कर दी थी। इसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश का पद भी शामिल है। नई नियुक्तियों से पहले अदालत में छह पद खाली थे, जिनमें से पांच अब भर दिए गए हैं।
हालांकि, इस महीने दो न्यायाधीश सेवानिवृत्त होने वाले हैं। न्यायमूर्ति पंकज मिथल 16 जून को और न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी 28 जून को रिटायर होंगे। ऐसे में आने वाले दिनों में रिक्त पदों की संख्या फिर बढ़ सकती है।
इन नियुक्तियों में सबसे अधिक चर्चा वरिष्ठ अधिवक्ता वी.एस. मोहना की हो रही है। वह वर्ष 2018 में न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा के बाद बार से सीधे सुप्रीम कोर्ट की जज बनने वाली देश की दूसरी महिला हैं। 59 वर्षीय मोहना ने कोयंबटूर लॉ कॉलेज से कानून की पढ़ाई की और वर्ष 2015 में उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा मिला था।
मोहना के सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court ) पहुंचने के बाद अब सर्वोच्च न्यायालय में महिला न्यायाधीशों की संख्या दो हो गई है। दूसरी महिला न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना हैं, जो वर्ष 2027 में देश की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश बनने की कतार में हैं।








