• About us
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • Terms & Conditions
  • Child Safety Policy
  • Contact
24 Ghante Latest Hindi News
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
No Result
View All Result

यूपीआईटीएस: स्वाद की विरासत को मिली वैश्विक उड़ान

Writer D by Writer D
01/10/2026
in Main Slider, उत्तर प्रदेश, नोएडा
0
14
SHARES
176
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterShare on Whatsapp

-राज कुमार भगत, अध्यक्ष, चैंबर ऑफ फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज (सीएफपीआईए)

शिलालेख घिस जाते हैं, इमारतें जर्जर हो जाती हैं, पर स्वाद पीढ़ियों के हाथों से होकर आगे बढ़ता रहता है। उत्तर प्रदेश के पास स्वाद भरे व्यंजनों की विरासत का अकूत खज़ाना है। बनारस की मलाईयो, लखनऊ की चाट, आगरा का पेठा, मथुरा का पेड़ा, कन्नौज का गुलाब जल, हाथरस की हींग, ये व्यंजन नहीं, इतिहास के जीवित दस्तावेज़ हैं। अब तक ये गली-मोहल्लों, मेलों और यात्रियों की स्मृतियों तक सिमटे रहे। पहली बार इन्हें वैश्विक व्यापार की मेज़ पर पूरी गंभीरता के साथ रखा गया है। यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन कुज़ीन’ (ODOC) को केंद्र में रखकर योगी सरकार ने एक स्पष्ट संदेश दिया है-‘विरासत बोझ नहीं, पूंजी है और परंपरा पिछड़ेपन की निशानी नहीं, आत्मनिर्भरता की नींव है।’

यह संदेश उस बड़ी सोच का विस्तार है, जिसकी शुरुआत वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) से हुई थी। सरकार का मूल तर्क सीधा है। जब किसी जिले की पहचान को ब्रांड, बाजार और नीतिगत सहारा मिलता है, तो कारीगर का हुनर उद्योग बन जाता है और स्थानीय उत्पाद वैश्विक वस्तु। ‘वोकल फॉर लोकल’ का नारा यहां 75 जिलों के उद्यमियों के लिए व्यावहारिक कार्ययोजना का रूप ले लेता है। ऐसी कार्ययोजना जिसमें उत्तर प्रदेश स्वयं को उत्पादक और निर्यातक शक्ति के रूप में गढ़ना चाहता है। ट्रेड शो में 90 देशों से पहुंचे 600 से अधिक खरीदारों ने यूपी के ‘वोकल फार लोकल’ की इसी ताकत को देखा।

ओडीओसी में व्यापार की असीम संभावनाएं हैं। पूरी दुनिया में प्रामाणिक और  प्राकृतिक खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ रही है। प्रवासी भारतीयों की विशाल आबादी, भारतीय खान-पान की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता और प्रीमियम व ऑर्गेनिक उत्पादों के प्रति उपभोक्ताओं का रुझान, ये तीनों कारक ओडीओसी के पक्ष में खड़े हैं। खाड़ी देशों से लेकर यूरोप और उत्तरी अमेरिका तक, खरीदार अब केवल स्वाद नहीं, प्रामाणिकता और भरोसा खरीदना चाहता है। उत्तर प्रदेश के व्यंजनों के पास ये दोनों हैं और वे अब मानकीकरण, बेहतर पैकेजिंग और कुशल लॉजिस्टिक्स की ओर बढ़ रहे हैं। जेवर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे और एक्सप्रेसवे नेटवर्क जैसा बुनियादी ढांचा इसमें रीढ़ साबित होगा। ओडीओसी में व्यापार की संभावनाओं को इस नजरिए से भी देखा जा सकता है कि ओडीओपी में जिन उत्पादों को जीआई टैग मिला है, उनमें बड़ी संख्या खाद्य पदार्थों की भी है।

परन्तु, ओडीओसी का असली आयाम आर्थिक आंकड़ों से है। ओडीओसी उस विचार का प्रतिनिधि है जो मानता है कि विकास का रास्ता अपनी जड़ों से जुड़कर निकलता है। हलवाई, किसान, दुग्ध उत्पादक, स्व-सहायता समूह की महिला उद्यमी, ये सब इस श्रृंखला की कड़ियां हैं। इस श्रृंखला में संस्कृति और अर्थव्यवस्था एक-दूसरे के  सहयात्री बन जाते हैं। जैसे कि ओडीओपी ने पारंपरिक पहचान को संगठित रूप और बाजार दिया है, ताले, कालीन, चिकनकारी और मृद्भांड जैसे शिल्पों को नई सांस मिली है, ओडीओसी उसी सूत्र को खान-पान की दुनिया में लागू करने का प्रयास है। यह पहल प्रदेश के 75 जिलों की सदियों पुरानी स्वाद परंपरा को वैश्विक पहचान दिलाने और उसे संगठित खाद्य अर्थव्यवस्था का स्वरूप देने का लक्ष्य रखती है।

अभी तक ओडीओसी की पहुंच स्थानीय मेलों, पर्यटकों और क्षेत्रीय बाजारों तक सीमित थी। यूपीआइटीएस ने इस दायरे को तोड़ने की कोशिश की है। दुनिया भर के खरीदारों, बिज़नेस डेलिगेट्स, फूड चेन ऑपरेटरों और रिटेल कंपनियों के सामने इन उत्पादों को सीधे प्रस्तुत करना बहुत मायने रखता है। जब कोई विदेशी ट्रेड बायर इन व्यंजनों का स्वाद लेता है और उनके पीछे छिपे व्यावसायिक अवसरों को समझता है, तब ‘स्ट्रीट फूड’ की सीमित छवि टूटती है। जो हलवाई अब तक अपने कस्बे के ग्राहकों तक सिमटा था, वह अब सोच सकता है कि उसका उत्पाद खाड़ी, यूरोप या अमेरिका की दुकानों में पहुंचे। यह सोच ही अपने आप में उद्यमिता की क्रांति है।

पर वैश्विक बाजार में केवल बेहतरीन स्वाद के भरोसे टिका नहीं जा सकता। वहां मानकीकरण, सुरक्षा और निरंतरता की कसौटी पर हर उत्पाद परखा जाता है। इसी को ध्यान में रखकर उत्तर प्रदेश सरकार और एमएसएमई विभाग एक समग्र सहायता ढांचा तैयार कर रहे हैं, जो चार स्तंभों पर टिका है। इनमें पहला स्तंभ पैकेजिंग और शेल्फ-लाइफ का है। पारंपरिक मिठाइयों की लंबी यात्रा में सबसे बड़ी बाधा उनका जल्दी खराब होना है। सेंट्रल फूड टेक्नोलॉजी रिसर्च इंस्टीट्यूट (CFTRI)  के सहयोग से ऐसी तकनीकें उपलब्ध कराई जा रही हैं जिनसे उत्पाद बिना हानिकारक प्रिजर्वेटिव के महीनों तक ताज़ा रह सकते हैं। दूसरा स्तंभ वैश्विक मानक और प्रमाणन का है। अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में प्रवेश के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा मानक (एफएसएसएआई) के साथ HACCP (हेजार्ड एनालिसिस क्रिटिकल कंट्रोल प्वाइंट), आईएसओ प्रमाणन और ऑर्गेनिक या जीआई टैगिंग जरूरी है। स्थानीय कारीगरों, हलवाइयों और प्रसंस्करण इकाइयों को इसके लिए वित्तीय और तकनीकी मार्गदर्शन दिया जा रहा है, क्योंकि विदेशी खरीदार भरोसे पर नहीं, प्रमाणपत्र पर सौदा करता है।

तीसरा स्तंभ ब्रांडिंग और डिजिटल मार्केटिंग का है। आज का उपभोक्ता वस्तु के साथ उसके पीछे की कहानी भी खरीदता है। क्यूआर कोड-आधारित पैकेजिंग से वह उत्पाद के स्रोत, सामग्री और प्रामाणिकता की जानकारी सीधे पा सकेगा। चौथा और सबसे निर्णायक स्तंभ निर्यात सहायता और लॉजिस्टिक्स का है। निर्यात प्रक्रियाओं का सरलीकरण, एक्सपोर्ट क्रेडिट सब्सिडी और कोल्ड-चेन ढांचे का सुदृढ़ीकरण इसके मुख्य अंग हैं। जेवर हवाई अड्डे और एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जल्दी खराब होने वाले उत्पादों को दुनिया के किसी भी कोने तक कम से कम समय में पहुंचाना संभव है। खाद्य निर्यात में समय ही सबसे बड़ी पूंजी है, और यह बुनियादी ढांचा उसी पूंजी की रक्षा करता है।

इसमें चुनौतियां भी कम नहीं हैं। ऋण, सब्सिडी और प्रशिक्षण का सरल होना अनिवार्य है। प्रामाणिकता, मानकीकरण और निरंतरता पर भी ध्यान देना होगा। एक बार का निर्यात ऑर्डर उपलब्धि है, पर नियमित आपूर्ति ही विश्वसनीयता बनाती है, जिसके लिए कच्चे माल की स्थिर उपलब्धता, गुणवत्ता नियंत्रण और मजबूत कोल्ड-चेन जरूरी है। इन चुनौतियों के बावजूद ओडीओसी की सामाजिक-आर्थिक क्षमता को कम नहीं आंका जा सकता। खाद्य क्षेत्र उन गिने-चुने क्षेत्रों में है, जहां कम पूंजी और पारंपरिक कौशल से शुरुआत संभव है और जहां रोजगार जमीनी स्तर तक पहुंचता है। जब किसी जिले का व्यंजन वैश्विक ब्रांड बनता है, तो किसान, दूध और मेवे के आपूर्तिकर्ता, हलवाई, पैकेजिंग इकाई, परिवहनकर्ता और पर्यटन से जुड़े लोग, सब लाभान्वित होते हैं। इसके साथ खाद्य पर्यटन की संभावना भी जुड़ी है। जो खरीदार या पर्यटक आगरा का पेठा या बनारस की लस्सी चखेगा, उसमें उस शहर की गलियों तक पहुंचने की जिज्ञासा भी जागेगी। इस तरह ओडीओसी प्रदेश के पर्यटन उद्योग का भी सहयोगी बन सकता है। यूपीआईटीएस में ओडीओसी को मिली प्रमुखता एक शुरुआत है, मंज़िल अभी बाकी है। ओड़ीओपी ने हाथ के हुनर को बाजार दिलाया था, ओडीओसी स्वाद की विरासत को वही सम्मान दिलाने की कोशिश है।

Tags: UPITS
Previous Post

योगी सरकार में पारदर्शी चयन प्रक्रिया को गति, प्रवर्तन कांस्टेबल के 477 पदों पर अंतिम परिणाम जारी

Next Post

‘अखिलेश से पूछिए, इंडी गठबंधन की बैठक में क्यों नहीं आए?’, ओपी राजभर का राहुल गांधी पर सीधा हमला

Writer D

Writer D

Related Posts

उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश में जैन पर्यटन को रफ्तार, फिरोजाबाद स्थित छदामी लाल जैन मंदिर का 80 फीसदी काम पूरा

01/10/2026
Main Slider

वीरता पदक पाकर बोले पुलिसकर्मी- अत्याधुनिक संसाधनों से मजबूत हुई पुलिसिंग, जनता में बढ़ा सुरक्षा का भरोसा

01/10/2026
Main Slider

वृद्धजन परिवार की विरासत और सुरक्षाकवच, सम्मान-सुरक्षा मेरी जिम्मेदारी: धामी

01/10/2026
Main Slider

‘अखिलेश से पूछिए, इंडी गठबंधन की बैठक में क्यों नहीं आए?’, ओपी राजभर का राहुल गांधी पर सीधा हमला

01/10/2026
UPSC
Main Slider

योगी सरकार में पारदर्शी चयन प्रक्रिया को गति, प्रवर्तन कांस्टेबल के 477 पदों पर अंतिम परिणाम जारी

01/10/2026
Next Post

‘अखिलेश से पूछिए, इंडी गठबंधन की बैठक में क्यों नहीं आए?’, ओपी राजभर का राहुल गांधी पर सीधा हमला

यह भी पढ़ें

Agniveer

अग्निवीर भर्ती का रिजल्ट हुआ जारी, यहां से करें चेक

20/05/2023
susheel modi

कांग्रेस स्व़यं को समाप्त कर रही है और आरोप भाजपा पर लगाती है : सुशील मोदी

26/08/2020
oxygen

कोविड मरीजों की मदद के लिए आगे आया RIL, भेजे 100 टन ऑक्सिजन

16/04/2021
Facebook Twitter Youtube

© 2017 24घंटेऑनलाइन

  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म

© 2017 24घंटेऑनलाइन

Go to mobile version