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योगी सरकार के 9 वर्षों में यूपी का इंफ्रास्ट्रक्चर ट्रांसफॉर्मेशन

Writer D by Writer D
20/03/2026
in उत्तर प्रदेश, राजनीति, लखनऊ
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Infrastructure

CM Yogi

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लखनऊ। पिछले 9 वर्षों में उत्तर प्रदेश ने ऊर्जा और जल क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के निर्माण के जरिए अभूतपूर्व बदलाव दर्ज किया है। जहां एक ओर प्रदेश में 765 नए उपकेंद्रों, 26,091 सर्किट किमी ट्रांसमिशन लाइनों और 1.24 लाख सर्किट किमी से अधिक बिजली वितरण नेटवर्क का विस्तार कर मजबूत पावर इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) खड़ा किया गया, वहीं दूसरी ओर ₹16,177 करोड़ की लागत से 74 सीवरेज परियोजनाओं, 155 एसटीपी, 80 घाटों और 5.18 लाख किमी पाइपलाइन नेटवर्क के माध्यम से जल प्रबंधन को नई दिशा दी गई है। गांव-गांव तक बिजली और घर-घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लक्ष्य के साथ विकसित यह इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) न केवल वर्तमान आवश्यकताओं को पूरा कर रहा है, बल्कि उत्तर प्रदेश को सतत और समग्र विकास के एक मजबूत मॉडल के रूप में स्थापित कर रहा है।

2017 से पहले की स्थिति

वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में बुनियादी ढांचा विशेषकर ऊर्जा और जल प्रबंधन के क्षेत्र में सीमित और असंगठित था। बिजली आपूर्ति का नेटवर्क पूरी तरह विकसित नहीं था और उपकेंद्रों व ट्रांसमिशन लाइनों की संख्या अपेक्षाकृत कम थी। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच असमानता स्पष्ट दिखती थी। जल क्षेत्र में भी स्थिति चुनौतीपूर्ण थी। सीवरेज सिस्टम सीमित था, गंगा किनारे प्रदूषण एक बड़ी समस्या थी और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की संख्या कम होने के कारण शोधन क्षमता अपर्याप्त थी। पाइप जल आपूर्ति का नेटवर्क भी सीमित था, जिससे बड़ी आबादी शुद्ध पेयजल से वंचित थी।

पिछले 9 वर्षों की उपलब्धि

पिछले 9 वर्षों में उत्तर प्रदेश ने ऊर्जा और जल क्षेत्र में बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) निर्माण कर एक मजबूत आधार तैयार किया है। ऊर्जा क्षेत्र में 765 नए 33/11 केवी उपकेंद्र स्थापित किए गए, वहीं हाई वोल्टेज स्तर पर 3 (765 केवी), 22 (400 केवी), 72 (220 केवी) और 104 (132 केवी) उपकेंद्रों का निर्माण किया गया। इसके साथ ही 26,091 सर्किट किमी नई ट्रांसमिशन लाइनों और 1,24,210 सर्किट किमी बिजली वितरण लाइन (एबी केबल) बिछाकर पूरे प्रदेश में आधुनिक बिजली नेटवर्क खड़ा किया गया। ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर का निर्माण कर उत्तर प्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी स्थान प्राप्त किया है। बिजली उत्पादन के क्षेत्र में भी खुर्जा, घाटमपुर, जवाहरपुर, ओबरा-सी और पनकी जैसी बड़ी तापीय परियोजनाओं के निर्माण से उत्पादन क्षमता को मजबूत किया गया है।

जल क्षेत्र में ₹16,177 करोड़ की लागत से 74 सीवर शोधन परियोजनाएं विकसित की गईं, जिनमें से 41 पूरी हो चुकी हैं और 33 निर्माणाधीन हैं। प्रदेश में कुल 155 एसटीपी संचालित हैं, जिनकी क्षमता 4,701.6 एमएलडी है। गंगा किनारे इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ करते हुए 80 घाटों और 15 शवदाह गृहों का निर्माण किया गया। वाराणसी में 26 घाटों और 8 कुंडों का पुनरोद्धार व सौंदर्यीकरण किया गया। पर्यावरणीय दृष्टि से 231 आर्द्रभूमियों के लिए मैनेजमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया गया तथा गंगा किनारे बायोडायवर्सिटी पार्कों का निर्माण किया जा रहा है। पेयजल आपूर्ति के क्षेत्र में 5.18 लाख किमी पाइपलाइन नेटवर्क बिछाया गया, जिससे 97,000 से अधिक गांवों को जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। 2.22 करोड़ से अधिक घरों तक नल जल कनेक्शन पहुंचाया गया है, जबकि 35,746 गांवों में 100% कवरेज हासिल किया जा चुका है।

भविष्य का विजन

आने वाले समय में उत्तर प्रदेश का फोकस इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) को और अधिक आधुनिक, सतत और टेक्नोलॉजी आधारित बनाने पर है। ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर को और विस्तार देते हुए स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा दिया जाएगा। जल क्षेत्र में सभी 97,000 से अधिक गांवों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया है और पाइपलाइन नेटवर्क को 5.63 लाख किमी तक विस्तार दिया जाएगा। सीवरेज और जल शोधन क्षमता को और मजबूत करते हुए प्रदूषण नियंत्रण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। पर्यावरण संरक्षण के तहत वेटलैंड, बायोडायवर्सिटी पार्क और नदी तट विकास को और गति दी जाएगी, जिससे विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित किया जा सके।

Tags: Yogi News
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